Tag - वैराग्य

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मोक्ष मार्ग की सबसे बड़ी बाधा है ख्याति : आचार्य विमर्श सागर जी के सान्निध्य में वैरागी ब्रह्मचारियों की विनौली यात्रा एवं गोद भराई संपन्न

गुरुग्राम के डीएलएफ फेस-2 स्थित श्री मुनिसुव्रतनाथ दिगंबर जैन मंदिर में आचार्य श्री विमर्श सागर जी महाराज के सान्निध्य में वैरागी ब्रह्मचारियों की विनौली...

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मृत्यु निश्चित, संबंध अस्थायी, कर्मों का फल अवश्य मिलता है : आचार्य विनिश्चय सागर ने दिया वैराग्य और आत्मकल्याण का संदेश

सुरुरपुर में आयोजित श्री मज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक महोत्सव के दौरान आचार्य श्री विनिश्चय सागर जी महाराज ने मृत्यु-स्मरण, कर्म सिद्धांत, वैराग्य और आत्मकल्याण पर...

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श्रमण संस्कृति के आचार्य श्री विद्यासागर जी का द्वितीय समाधि दिवस : जिनवाणी आगम को जीवन का मार्ग बनाने वाले संत आचार्य श्री विद्यासागर जी 

श्रमण संस्कृति के आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज का द्वितीय समाधि दिवस मंगलवार को पूरे भारत में श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। इंदौर से पढ़िए...

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दसलक्षण पर्व पर त्याग और दान का गूढ़ महत्व समझाया : मन के विकारों का शमन ही है उत्तम त्याग – मुनिश्री विलोक सागर

मुरैना में दसलक्षण पर्व के आठवें दिन बड़े जैन मंदिर में मुनिश्री विलोक सागर जी और मुनिश्री विबोध सागर जी ने कहा कि उत्तम त्याग का अर्थ केवल वस्तुओं का त्याग...

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संत समागम में आचार्य वर्धमान सागर जी ने कहा – रागी को बैरागी बनाने का सूत्र धर्म है : प्रथमाचार्य शांतिसागर जी के योगदान को याद कर दी आचार्य भक्ति की प्रेरणा

आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने संत समागम के दौरान धर्म को रागी से बैरागी बनने का मार्ग बताया। प्रथमाचार्य शांतिसागर जी महाराज के अविस्मरणीय योगदानों का...

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भावलिंगी संत आचार्य श्री विमर्शसागर जी ने किया केशलौंच : सहारनपुर में आर्यिका माताजी ने भी दीक्षा उपरांत प्रथम केशलौंच किया

सहारनपुर में भावलिंगी संत आचार्य श्री विमर्शसागर जी महाराज ने प्रातः बेला में दिगंबर मुनियों की कठोर चर्या केशलौंच सम्पन्न किया। उनके साथ आर्यिका विमर्शिता...

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मुनि श्री संधान सागर महाराज ने किया 24 घंटे का प्रतिमायोग : भोपाल में एक ही आसन में ध्यानस्थ रहे मुनि श्री

भोपाल के श्री पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर में मुनि श्री संधान सागर महाराज ने सोमवार प्रातः 5 बजे से लगातार 24 घंटे तक प्रतिमायोग साधना धारण की। वे 48 घंटे बाद ही...

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आचार्य वर्धमान सागर बोले-वैराग्य, व्रत संयम और रत्नत्रय से संवेग भावना जाग्रत होती है: 15 अगस्त का संदेश — जैसे देश आज़ाद हुआ, वैसे ही आत्मा को भी कर्म बंधन से मुक्त कराना है

आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने 16 कारण भावना अंतर्गत संवेग भावना की विस्तृत विवेचना करते हुए कहा कि मनुष्य जीवन में वैराग्य, व्रत संयम और रत्नत्रय से ही सच्चा...

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वैराग्य पाठ उनसे सीखों, जिसके अंदर आत्मानुशासन होः संगम नगर में विराजमान मुनिश्री प्रमाण सागरजी

मुनिश्री ने कहा ‘आत्मविश्वास‘ और आत्म नियंत्रण आपको लौकिक जगत में भी सफलता दिलाता है और आध्यात्म को भी मजबूत करता है, जिसका अंदर से सेल्फ कान्फीडेंस मजबूत होता...

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गणिनी आर्यिका श्री सौम्य नंदिनी माताजी ने प्रदान किया आशीर्वाद : वैराग्य की कोई उम्र नहीं होती 

वैराग्य कब और किस उम्र में आ जाए, ये कहा नहीं जा सकता। उक्त पंक्ति को चरितार्थ किया है कुमारी रिद्धि जैन पुत्री रामकुमार जैन निवासी राजाखेड़ा ने। कुमारी रिद्धि...

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