बुधवार प्रातः श्री दिगंबर जैन समाज के सानिध्य में जैन मंदिर में श्री शांतिनाथ भगवान का महमस्तिकाभिषेक और विशेष गुरु मुख से शांतिधारा कराई गई। इसके बाद कार्यक्रम प्रारंभ किया गया। झुमरी तिलैया से पढ़िए, राज कुमार जैन अजमेरा और नवीन जैन की यह खबर…
झुमरीतिलैया। बुधवार प्रातः श्री दिगंबर जैन समाज के सानिध्य में जैन मंदिर में श्री शांतिनाथ भगवान का महमस्तिकाभिषेक और विशेष गुरु मुख से शांतिधारा कराई गई। इसके बाद कार्यक्रम प्रारंभ किया गया। जिसमें सर्व प्रथम सौधर्म इंद्र प्रदीप-मीरा जैन छाबड़ा के द्वारा ध्वजारोहण किया गया।मुनि श्री भाव सागर जी मुनिराज को कमंडल अर्पण करने का सौभाग्य प्रदीप-मीरा जैन छाबड़ा, संजय-बबीता जैन गंगवाल के परिवार को प्राप्त हुआ। समाधिस्थ आचार्य श्री ज्ञान सागर जी और उनके परम प्रभावक शिष्य समाधिस्थ आचार्य श्री विद्यासागर जी के चरण चिंह का प्राण प्रतिष्ठा नगर में प्रथम बार हुआ। मुनिद्वय ने 84 मंत्रों के साथ पूजा-पाठ आदि जाप के साथ प्रतिष्ठा करवाई। अष्ठ कुमारी ने भी पूजन किया। ये चरण चिन्ह पाटनी परिवार आरके मार्बल किशनगढ़ (राजस्थान) ने दिए जो देवघर जैन मंदिर में स्थापित होंगे।
24 भगवान के मोक्ष कल्याणक महोत्सव मनाना चाहिए
मुनिश्री धर्म सागर जी मुनिराज और मुनि श्री भाव सागर जी मुनिराज ने इस अवसर पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि मेरा भी सौभाग्य है कि 22 वर्ष में प्रथम बार महाकवि आचार्य श्री ज्ञान सागर जी महाराज के चरण चिह्न की प्रतिष्ठा का अवसर प्राप्त हुआ। इस तिथि में दीक्षित सभी मुनिराज स्वस्थ रहें एवं जिन शासन की प्रभावना करते रहें। श्रीअभिनंदन नाथ भगवान का महोत्सव मनाया गया। यह भी सौभाग्य की बात है। 24 भगवान के मोक्ष कल्याणक महोत्सव मनाना चाहिए। मोक्ष की प्रस्तावना, कर्मों की समीक्षा, समता का उद्घाटन है। शून्य से शिखर तक की यात्रा है। आत्म उत्थान का मुकाम है। निर्माण से निर्वाण तक की यात्रा है दीक्षा। जितने भी साधु इस तिथि में दीक्षित हुए वह हमेशा स्वस्थ रहें जिनशासन की प्रभावना करते रहे। उन सभी को हम यहीं से नमस्कार करते हैं। 84 करोड़ मंत्रों में सबसे बड़े महामंत्र में गुरु का नाम आता है, गुरु के माध्यम से हृदय का आंगन पवित्र हो जाता है। गुरु जी कहते थे गौशालाएं जीवित कारखाना है। विदेशी गुलामी का प्रतीक इंडिया नहीं हमें गौरव का प्रतीक भारत देश नाम चाहिए और हम सब को इंडिया नही भारत कहना है साथ ही हिन्दी भाषा मे बहुत जोर देते थे।
मुनि श्री का दीक्षा महोत्सव तिथि अनुसार मनाया जाएगा
आज गुरु नही है, मगर गुरु चरण ही हम सब के लिए पूज्य है इसलिये गुरु चरण की प्रतिष्ठा कर गुरु चरण विराजमान किया जा रहा है। इसके बाद गुरु पूजा सुबोध-आशा जैन गंगवाल के संगीतमय पूजन आचार्य छत्तीसी बिधान के द्वारा किया गया। जिसमें 36 अर्घ्य के साथ श्रीफल मंडप पर सभी भक्तों ने चढ़ाए और साथ ही निर्वाण लड्डू भी भक्तों द्वारा प्रभु चरणों मे समर्पित किए। इन सभी कार्यक्रम में विशेष रूप से शामिल समाज के उप मंत्री नरेंद्र जैन झांझरी, जय कुमार जैन गंगवाल, ललित जैन सेठी, महिला समाज की अध्यक्ष नीलम जैन सेठी, मंत्राणी आशा जैन गंगवाल शामिल हुए। आहार चर्या नया मंदिर की ओर से हुई। सभी कार्यक्रम स्थानीय पंडित अभिषेक शास्त्री ने करवाए। गुरुवार को गुरु पूजा और मुनि श्री का दीक्षा महोत्सव तिथि अनुसार मनाया जाएगा।













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