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विश्व पर्यावरण दिवस विशेष : घर को बनाया ग्रीन हाउस


कार्बन गैसों के उत्सर्जन को कम करने की बात हो रही हे, लेकिन सुविधाभोगी बनते मनुष्य को इसकी तनिक भी फिक्र नहीं है। उसे तो केवल अपने आराम की चिंता है। ऐसे में कस्बे के समाज सेवी गोविन्द धाकड़ हैं, जो पर्यावरण संरक्षण के साथ ग्लोबल वार्मिंग से बढ़ते तापमान की समस्या का निदान भी ढूंढ चुके हैं। पढ़िए सौरभ जैन की रिपोर्ट


सुनेल। दुनिया विश्व पर्यावरण दिवस मना रही है। दुनिया में बढ़ते प्रदूषण के साथ ग्लोबल वार्मिंग भी बढ़ी है। कार्बन गैसों के उत्सर्जन को कम करने की बात हो रही हे, लेकिन सुविधाभोगी बनते मनुष्य को इसकी तनिक भी फिक्र नहीं है। उसे तो केवल अपने आराम की चिंता है। ऐसे में कस्बे के समाज सेवी गोविन्द धाकड़ हैं, जो पर्यावरण संरक्षण के साथ ग्लोबल वार्मिंग से बढ़ते तापमान की समस्या का निदान भी ढूंढ चुके हैं। उन्होंने अपने घर को मॉडल के रुप में ग्रीन हाउस तो बनाया है। उनके घर को देखने दूर-दूर से लोग आते हैं। वो पिछले 10 वर्षो से पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाने को अपने घर को गार्डन लगा रखा है। अपने घर पर चमेली, नीम, तुलसी, करेले, किन्नू, शीशम, गुलमोहर, अशोक सहित फल-फूल वाले पेड़ और पौधों का समावेश है।

तापमान पांच डिग्री सेल्सियस तक कम 

गोविन्द धाकड़ कहते हैं कि घर के आंगन में विभिन्न प्रकार के लगभग 400 से 500 पेड़-पौधे लगा रखे हैं। इससे तापमान में करीब पांच डिग्री सेल्सियस तक का अंतर रहता है।

हरियाली लाना है उद्देश्य 

गोविन्द धाकड़ कहते हैं कि उनका उद्देश्य हरियाली लाना है। ऐसे पौधों को लगाना है जो सुनेल की जलवायु में विशेष किसी खास प्रयास के पनप सकें। वैज्ञानिक युग में हुए मशीनीकरण ने वातावरण को इतना विषाक्त बना दिया है कि मनुष्य अनेक असाध्य बीमारियों का शिकार होता जा रहा है। स्वास्थ्य जो प्रकृति का वरदान था, उसे खरीदना पड़ रहा है। यह स्वास्थ्यरक्षक घोल भी वृक्ष ही देगा। जन्म से मृत्यु तक वृक्ष हमारा साथी, इसलिए उसे प्रश्रय देना आवश्यक है। वृक्ष फूलदार, फलदार या छाया देने वाला हो, समान रूप से लाभकारी है। इसलिए सभी को कम से कम पांच पौधे जरुर लगाना चाहिए। वहीं अपने जन्मदिवस, वैवाहिक वर्षगांठ आदि उत्सवों पर एक-एक पौधे लगाना चाहिए।

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