भगवान श्री शांतिनाथ जी के जन्म, तप और मोक्ष कल्याणक के दिन विश्व पर्यावरण दिवस मनाने की ज़रूरत है।
इंदौर। भगवान श्री शांतिनाथ जी के जन्म, तप और मोक्ष कल्याणक के दिन ही विश्व मना रहा है विश्व पर्यावरण दिवस। भगवान शांतिनाथ के जीवन एवं उपदेश को दृष्टिगत रखते हुए यदि हम चिंतन करे काफी कुछ सीखा जा सकता है, अन्यथा इस दिवस जिसमें दिनों दिन गिरते हुए पर्यावरण के कारणों एवं पर्यावरण संरक्षण पर खूब चर्चा होगी जिसका कोई फायदा नहीं है। जब तक हम हमारी दिनचर्या में बदलाव नहीं लाएंगे तब तक कोरे पर्यावरण दिवस मनाने से क्या फायदा। उक्त जानकारी देते हुए वर्द्धमानपुर शोध संस्थान के संयोजक एवं डाक टिकट संग्राहक ओम पाटोदी ने बताया कि भारत की मूल जीवन शैली विशेष रूप से जैन दिनचर्या इतनी वैज्ञानिक और सधी हुई होती है कि मात्र उसके अनुसरण करने से ही पर्यावरण संरक्षण की सारी चिंताएं दूर हो जाती है।
महावीर वाणी जहां एक और अनावश्यक रूप से फूल ओर पत्ते को भी तोड़ने की मनाही करती है वहां हम लोग धड़ल्ले से पेड़ों को ही कटते जा रहे हैं, महावीर वाणी में जहां पानी के कम से कम उपयोग की बात कही गई है वहि आज हम पानी का धड़ल्ले से दुर्पयोग करने पर आमादा है। कुल मिलाकर महावीर वाणी में जल, ज़मीन ओर जंगल भरपूर संरक्षण का उपदेश है। यदि आज विश्व पर्यावरण दिवस और भगवान शांतिनाथ जी के जन्म तप ओर निर्वाण कल्याणक दिवस पर सिर्फ भारत की मूल जैन दिनचर्या पर शोध करने का निर्णय करें तो निश्चित रूप से हम पर्यावरण संरक्षण के अपने लक्ष्य को आसानी से पा सकते हैं।
ज़रूरत यह हमारी वर्तमान भौतिकतावादी दिनचर्या को तिलांजलि देकर हमारी वास्तविक भारतीय जीवन पद्धति को विश्वव्यापी बनाने की। भारतीय डाक विभाग द्वारा भी समय समय पर्यावरण संरक्षण जागरूकता हेतु कई डाक टिकट जारी किए गए हैं।













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