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नेमिनगर जैन कॉलोनी में नौ दिवसीय सिद्धचक्र मंडल विधान का चौथा दिन : नए शास्त्र बनाएं लेकिन प्राचीन के साथ छेड़खानी न करें – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर


अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर महाराज और क्षुल्लक अनुश्रमण सागर महाराज के सानिध्य में नेमिनगर जैन कॉलोनी में नौ दिवसीय सिद्धचक्र मंडल विधान के चौथे दिन सिद्धों की आराधना करते हुए 64 अर्घ्य मंडल पर समर्पित किए गए। इस अवसर पर मुनि श्री के प्रवचन भी हुए। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…


इंदौर। अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर महाराज और क्षुल्लक अनुश्रमण सागर महाराज के सानिध्य में नेमिनगर जैन कॉलोनी में नौ दिवसीय सिद्धचक्र मंडल विधान के चौथे दिन बुधवार को धर्म सभा को संबोधित करते हुए अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज ने कहा कि जिनवाणी मां है।

उसके साथ कोई छेड़खानी करेगा तो बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। माता जिनवाणी के बिना हम न तो अपनी चर्या कर सकते हैं और न ही अपनाकल्याण।

आज जिस प्रकार से जिनवाणी के साथ छेड़खानी की जा रही, उससे इतिहास बदला जा रहा है।

आज अनुष्ठान की क्रिया अधूरी हो रही है। प्राचीन पूजा और उनकी क्रिया में बीच- बीच में अपनी बातें डाल कर प्राचीन इतिहास समाप्त कर रहे हैं।

अलग नाम से अलग लिखे शास्त्र बनाएं लेकिन प्राचीनता के साथ कुछ नहीं करें।

जो शास्त्रों के साथ छेड़खानी करेगा, वह नीच गति का पात्र बनेगा।

इन सब के कारण ही समाज में पंथ और संत वाद का जन्म हो गया है।

64 अर्घ्य किए गए समर्पित

इससे पहले बुधवार को सिद्ध चक्र विधान की आराधना करते हुए मंडल पर 64 अर्घ्य समर्पित किए।

भगवान की शांतिधारा अतुल कुमार बसंत कुमार अर्चना जैन और मुनि का पाद पक्षालन रविंद्र प्रमोदिनी जैन द्वारा किया गया।

शास्त्र भेंट महिला मंडल द्वारा किया गया।

सभा का संचालन समाज के महामंत्री गिरिश पाटोदी ने किया और आभार समाज अध्यक्ष कैलाश लुहाड़िया ने व्यक्त किया।

विधि विधान का कार्य महेंद्र गंगवाल द्वारा किया गया।

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