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निर्वाण कल्याणक महोत्सव मनाया : अन्तरराष्ट्रीय लोकोदय तीर्थक्षेत्र पर विशाल जीवन्त नन्दीश्वर द्वीप की हुई घोषणा


हरीपर्वत स्थित श्री 1008 शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर के अमृत सुधा सभागार में निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज एव क्षुल्लक श्री गंभीर सागर जी महाराज ससंघ के पावन सानिध्य एवं श्री दिगंबर जैन धर्म प्रभावना समिति के तत्वावधान में 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी का निर्वाण कल्याणक एवं चातुर्मास निष्ठापना महोत्सव बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। पढ़िए शुभम जैन की रिपोर्ट….


आगरा। हरीपर्वत स्थित श्री 1008 शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर के अमृत सुधा सभागार में निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज एव क्षुल्लक श्री गंभीर सागर जी महाराज ससंघ के पावन सानिध्य एवं श्री दिगंबर जैन धर्म प्रभावना समिति के तत्वावधान में 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी का निर्वाण कल्याणक एवं चातुर्मास निष्ठापना महोत्सव बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। महोत्सव का शुभारंभ सर्वप्रथम सौभाग्यशाली भक्तों ने स्वर्ण कलशों से श्रीजी का अभिषेक एवं वृहद शांतिधारा के साथ किया। तत्पश्चात विधानाचार्य प्रदीप जैन भैया सुयश के कुशल निर्देशन में भक्तों ने मंत्रोच्चारण के साथ पूजन की मांगलिक क्रियाएं संपन्न कीं। इसके उपरांत बालिकाओं ने जैन भजनों पर बहुत सुंदर नृत्य कर मंगलाचरण की प्रस्तुति दी। साथ ही गुरुभक्तों ने मुनिश्री का पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंटकर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। विधानाचार्य प्रदीप जैन शास्त्री के निर्देशन एवं मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज के सानिध्य में भगवान महावीर के प्रथम निर्वाण लाडू चढ़ाने का सौभाग्य अन्नपूर्णा समूह के अनिल जैन शास्त्री परिवार, नरेन्द्र जैन फर्नीचर, दिलीप जैन, के के जैन व रूपेश जैन को प्राप्त हुआ। दूसरा लाडू चढ़ाने का सौभाग्य एचएल जैन बैनाडा परिवार को इसके अतिरिक्त तीसरा सौभाग्यशाली परिवार निर्मल कुमार वीरेन्द्र कुमार जैन मोठया का रहा। अन्य भक्तों द्वारा निर्वाण कांड का वाचन कर 24 किलो का निर्वाण लड्डू भगवान महावीर स्वामी के समक्ष अर्पित किया। इस कार्यक्रम में संगीत दीपक जैन, शशि पाटनी एवं ख्याति जैन द्वारा दिया गया।


अमावस की काली रात बनाई पवित्र

इस अवसर पर मुनिपुंगव श्री ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए भक्तों से कहा कि आज संसार की सारी गलियों को पार करते हुए एक महान आत्मा ने एक ऐसी ऊंचाई पाई है, जो ऊंचाई संसार की प्रलय की विभीषिका से ऊपर है, जो जन्म और मरण से ऊपर है। तीन लोक भी उलट-पुलट किए जाएं तो भी उनके कुछ अंतर आने वाला नहीं है। वह जिस दशा को प्राप्त हुए, जिस क्षेत्र को प्राप्त हुए, वह दशा और क्षेत्र अपरिवर्तनशील है। हमारे वर्तमान शासन नायक महावीर स्वामी को पावापुर उद्यान से अव्याबाध सुख, सिद्धत्व की परिणति प्राप्त हुई। हम सभी का ऐसे महोत्सव को मनाने का मूल लक्ष्य होता है कि हम कभी एक दिन ऐसी दशा को प्राप्त हों लेकिन अभी हम भावना भा सकते हैं कि हे भगवान जैसा आपका निर्वाण कल्याणक मनाया गया, एक दिन मैं भी इस कल्याणक का अधिकारी बनूंगा। साधु कभी बंधन को प्राप्त नहीं होते लेकिन तीन बंधन उनको बांध देते हैं, आगम की आज्ञा, अंदर की करुणा और हमारे संघ की गुरु आज्ञा, यह तीन बंधन ऐसे होते हैं जिनके कारण से साधुओं को बंधना होता है। साधुओं के लिए समस्त दिशाएं खुली होती है। ऐसी स्थिति में जब चातुर्मास का बंधन आया तो सारी श्रमण संस्कृति ने अनादिकाल पहले ये निर्णय किया कि साधु कार्तिक बदी अमावस्या को बंधन से मुक्त होगा। हमारी तिथि इतनी पावन- पवित्र थी कि भगवान महावीर स्वामी ने भी इसी तिथि को मोक्ष जाने का निर्णय किया। भगवान को मोक्ष हुआ सो चातुर्मास का निष्ठापन नहीं होता। हमारे चातुर्मास निष्ठापन इसी तिथि में होते थे तो यह तिथि महावीर भगवान को इतनी पसंद आई कि उन्होंने कहा कि जिस दिन हमारे ढाई द्वीप का साधु चातुर्मास के बंधन से मुक्त होता है, उसी तिथि पर मैं संसार के बंधन से मुक्त होता हूं। जब दिवाली आती है तो उस दिन सुबह ऐसे उठो कि मैं दिवाली को देख रहा हूं, अगली दिवाली का आभार मानो कि अगली दिवाली मैंने जरूर इतने पावन ढंग से मनाई थी कि आज हंमें दुबारा दिवाली मनाने का मौका मिल गया। काल हमें पावन नहीं करेगा, हम काल को पावन करेंगे। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर स्वामी ने ऐसी काली अमावस्या, जिसको सारी दुनिया अशुभ मानती है, मजदूर भी उस दिन की कमाई नही, खाता इतनी अशुभ होती है, को ऐसे जिया कि सारी अमावस्याओं में दीपावली की अमावस्या पावन और पवित्र हो गयी।

कलश किया घर में स्थापित

इसके साथ ही मुनिसंघ का चातुर्मास 2023 का निष्ठापन भी हो गया। सौभाग्यशाली भक्तों ने जुलाई में चातुर्मास मंगल कलश मंदिर जी में स्थापित किए थे, उन सभी ने मंदिर जी से भव्य बैंड बाजों के साथ अपने घर की ओर प्रस्थान कर घर में स्थापित किया। आगरा की पावनधरा पर बनने जा रहे अन्तरराष्ट्रीय लोकोदय तीर्थक्षेत्र पर विशाल जीवन्त नन्दीश्वर द्वीप की रचना बनवाने की स्वीकृति ललित जैन डायमंड कार्पेट परिवार ने दी। इसके अलावा एक सहस्रकूट जिनालय की योजना इस तीर्थ में बनने की जानकारी भी पूज्य गुरुदेव निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव सुधासागर जी ने दी। उन्होंने उक्त तीर्थ में भविष्य में सेवाभावी योजनाओं जैसे स्कूल, कॉलेज, हॉस्पिटल आदि को भी जोड़ने की बात कही।

ये रहे मौजूद

कार्यक्रम का संचालन मनोज जैन बाकलीवाल द्वारा किया गया। इस अवसर पर प्रदीप जैन पीएनएसी, नीरज जैन जिनवाणी, निर्मल मोठया, वीरेंद्र मोठया, पन्नालाल बैनाड़ा, नवीन जैन, जगदीशप्रसाद जैन, हीरालाल बैनाड़ा, राजेश बैनाड़ा, मदनलाल बैनाड़ा, पंकज जैन सीटीवी, अमित जैन बॉबी, विवेक बैनाड़ा, ललित जैन, रुपेश जैन, अनिल जैन शास्त्री, नरेंद्र जैन फर्नीचर, दिलीप जैन, मीडिया प्रभारी शुभम जैन, अंकेश जैन, राकेश सेठी, पारसबाबू जैन, अमित जैन सेठी, अक्षय जैन, राकेश जैन बजाज, नरेश जैन, अनिल जैन, राकेश जैन पर्देवाले, समकित जैन, दीपक जैन, बीना बैनाड़ा, उषा मोठया, शशि जैन, ख्याति जैन सहित समस्त आगरा सकल जैन समाज एवं बाहर से पधारे बड़ी संख्या गुरुभक्त भी मौजूद रहे।

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