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गुरु पूर्णिमा पर 28 रजत कलशों से हुआ आचार्य श्री का पाद प्रक्षालन : जनकपुरी में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया गुरु वंदना महोत्सव


जयपुर के जनकपुरी स्थित श्री दिगम्बर जैन मंदिर में गुरु पूर्णिमा पर आचार्य श्री 108 आदित्य सागर जी महाराज के 28वें चातुर्मास के अवसर पर 28 परिवारों ने 28 रजत कलशों एवं 28 पवित्र रसों से पाद प्रक्षालन कर गुरु वंदना की। पढ़िए श्रीफल साथी पदम जैन बिलाला की यह रिपोर्ट।


जयपुर। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर जनकपुरी स्थित श्री दिगम्बर जैन मंदिर में आध्यात्म योगी आचार्य श्री 108 आदित्य सागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य में उनके 28वें चातुर्मास के अवसर पर श्रद्धा, भक्ति एवं गुरु वंदना का भव्य आयोजन सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर धर्मलाभ प्राप्त किया।

28 परिवारों ने किया पाद प्रक्षालन

गुरु पूर्णिमा महोत्सव का शुभारंभ शकुंतला बिंदायक्या एवं टीम के मंगलाचरण से हुआ। इसके उपरांत 28 परिवारों ने 28 रजत कलशों में 28 प्रकार के पवित्र रसों से आचार्य श्री का पाद प्रक्षालन किया। श्राविका स्नेहलता एवं विकास काला (बापू नगर) परिवार को दीप प्रज्वलन एवं पाद प्रक्षालन का सौभाग्य प्राप्त हुआ, जबकि शास्त्र भेंट का सौभाग्य सुनील पंसारी ने प्राप्त किया।

भक्तिमय बना मंदिर परिसर

पूरे मंदिर परिसर में जयघोष, भक्ति गीतों एवं मंगल ध्वनियों से वातावरण भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने गुरु पूजन, वंदना एवं आशीर्वाद ग्रहण कर अपने जीवन को धन्य बनाया।

गुरु का सान्निध्य आत्मकल्याण का मार्ग

अपने मंगल प्रवचन में आचार्य श्री आदित्य सागर जी महाराज ने कहा कि गुरु का सान्निध्य आत्मकल्याण का सर्वोत्तम मार्ग है। गुरु के बताए संयम, सदाचार एवं धर्म के पथ पर चलकर ही जीवन को सार्थक बनाया जा सकता है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं को धर्म, सेवा और स्वाध्याय के प्रति निरंतर जागरूक रहने की प्रेरणा दी।

श्रद्धालुओं ने लिया आशीर्वाद

कार्यक्रम के अंत में बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने गुरु चरणों में विनयपूर्वक वंदन कर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। पूरा आयोजन श्रद्धा, अनुशासन और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत रहा।

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