बड़ागांव धसान स्थित श्री उदार सागर जनकल्याण तीर्थ में आयोजित आठ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का समापन विश्व शांति महायज्ञ, 1024 महाअर्घ्य समर्पण, भव्य शोभायात्रा एवं वात्सल्य भोज के साथ श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में सम्पन्न हुआ। पढ़िए श्रीफल साथी मुकेश जैन लार की यह रिपोर्ट।
बड़ागांव धसान। श्री उदार सागर जनकल्याण तीर्थ, फलहोड़ी बड़ागांव धसान के तत्वावधान में आयोजित आठ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का समापन अत्यंत श्रद्धा, भक्ति एवं धार्मिक उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। अंतिम दिवस श्रद्धालुओं ने विश्व शांति एवं प्राणिमात्र के कल्याण की मंगलकामना करते हुए महायज्ञ में आहुतियाँ अर्पित कीं।
1024 महाअर्घ्य समर्पित कर की सिद्ध परमेष्ठी की आराधना
आयोजन के अंतिम दिन श्रद्धालुओं ने भगवान सिद्ध परमेष्ठी की आराधना करते हुए सामूहिक रूप से 1024 महाअर्घ्य समर्पित किए। प्रतिदिन की भाँति मूलनायक भगवान का कलशाभिषेक, नित्य पूजन एवं विश्व शांति के लिए विशेष शांतिधारा भी सम्पन्न हुई।
भव्य शोभायात्रा और महायज्ञ का आयोजन
समापन अवसर पर गाजे-बाजे के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें महिला श्रद्धालुओं ने जैन ध्वज के साथ उत्साहपूर्वक सहभागिता की। प्रतिष्ठाचार्य पं. ऋषभ जैन एवं पं. अजित जैन के निर्देशन में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यज्ञनायक एवं इंद्र-इंद्राणियों ने हवन कुंड में आहुतियाँ अर्पित कर विश्व कल्याण की कामना की।
सिद्धचक्र विधान आत्मशुद्धि का श्रेष्ठ माध्यम
प्रतिष्ठाचार्य पं. ऋषभ जैन ने कहा कि सिद्धचक्र महामंडल विधान आत्मशुद्धि, संयम एवं आध्यात्मिक उन्नति का श्रेष्ठ माध्यम है। भगवान सिद्ध की आराधना से सांसारिक दुःखों का निवारण होता है तथा मन, वचन और काय की शुद्धि से जीवन सार्थक बनता है।
समाज की रही उत्साहपूर्ण सहभागिता
कार्क्रम में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने इंद्र-इंद्राणी बनकर भक्ति एवं आराधना में भाग लिया। पूरा मंदिर परिसर प्रभु के जयघोषों से गुंजायमान रहा। पूर्णाहुति के पश्चात सभी श्रद्धालुओं के लिए वात्सल्य भोज (सात्विक महाप्रसाद) का आयोजन भी किया गया।
प्रमुख जनों की उपस्थिति
समपन समारोह में डॉ. कैलाश नुना, महामंत्री मुन्ना शाह, विजय जैन कुसमाड़ वाले (जयपुर), हुकुमचंद हटैया, प्रकाश सिंघई, सुखानंद सेठ, राकेश हटैया, प्रसन्न चौधरी सहित अनेक समाजजन उपस्थित रहे।













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