स्थानीय सालासर रोड स्थित आचार्य श्री धर्मसागर महाराज समाधि स्थल पर आचार्य 108 श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ के पावन सानिध्य में गुरु पूर्णिमा का महापर्व अत्यंत हर्षोल्लास और श्रद्धाभाव के साथ मनाया गया। सीकर नगरी के लिए यह ऐतिहासिक क्षण रहा क्योंकि, 39 वर्ष बाद आचार्य श्री का भव्य मंगल प्रवेश हुआ। सीकर से पढ़िए, डॉ. राजेश पंचोलिया की यह खबर…
सीकर। स्थानीय सालासर रोड स्थित आचार्य श्री धर्मसागर महाराज समाधि स्थल पर आचार्य 108 श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ के पावन सानिध्य में गुरु पूर्णिमा का महापर्व अत्यंत हर्षोल्लास और श्रद्धाभाव के साथ मनाया गया। सीकर नगरी के लिए यह ऐतिहासिक क्षण रहा क्योंकि, 39 वर्ष बाद आचार्य श्री का भव्य मंगल प्रवेश हुआ। भगवान महावीर चैरिटी ट्रस्ट एवं प्रबंध समिति के तत्वाधान में आयोजित इस आयोजन की शुरुआत प्रातः चातुर्मास स्थल से आचार्य धर्मसागर समाधि स्थल तक निकाली गई शोभायात्रा से हुई, जिसमें आचार्य श्री ससंघ के साथ सैकड़ों जैन धर्मावलंबी सम्मिलित हुए।
भव्य शिलापट्ट शिलान्यास समारोह मंत्रोच्चार के बीच संपन्न
गुरु पूर्णिमा महोत्सव के मुख्य आकर्षण के रूप में ‘आचार्य श्री धर्मसागर स्मारक’ का भव्य शिलापट्ट शिलान्यास समारोह मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुआ। उल्लेखनीय है कि सीकर की यह पावन धरा आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के दीक्षा गुरु धर्मशिरोमणि आचार्य श्री धर्म सागर जी महाराज की स्मृतियों से जुड़ी है। आचार्य श्री द्वारा अभिमंत्रित शिलाओं को मुख्य शिलान्यासकर्ता मां कमला देवी पदमचंद महेंद्र कुमार एवं समस्त धाकड़ा परिवार, निवासी सीकर प्रवासी चेन्नई एवं बैंगलोर द्वारा आचार्य श्री के सानिध्य में रखा गया। समारोह में जैन समाज के श्रेष्ठियों के साथ देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित थे।
बच्चों ने नृत्य मंगलाचरण प्रस्तुत किया
प्रातः काल से ही धार्मिक क्रियाओं का क्रम प्रारंभ हो गया। देशभर से आए भक्तों ने आचार्य श्री ससंघ के चरणों में अर्घ्य समर्पित कर चरण प्रक्षालन कर आशीर्वाद लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन से हुआ जिसका सौभाग्य धाकड़ा परिवार को प्राप्त हुआ। इसके पश्चात चित्र अनावरण और णमोकार मंत्र के जाप हुए। वर्धमान स्कूल के बच्चों ने नृत्य मंगलाचरण प्रस्तुत किया।
“गुरु की महिमा” का गुणगान किया
विभिन्न क्षेत्रों से पधारे गुरुभक्तों को आचार्य श्री का पाद प्रक्षालन करने का सौभाग्य मिला। शास्त्र भेंट का सौभाग्य भगवान दास, बाबूलाल, राजकुमार सेठी परिवार सीकर-जयपुर को मिला। आचार्य श्री धर्म सागर जी की संगीतमय पूजन आर्यिका श्री महायश मती जी ने कराई। अष्ट द्रव्यों से सौभाग्यशाली परिवारों ने अर्घ्य समर्पित किए। इसके बाद आचार्य श्री वर्धमान सागर जी की पूजन हुई और महाआरती के साथ “गुरु की महिमा” का गुणगान किया गया।
चातुर्मास आगमन पर भजन प्रस्तुत
महाआरती का सौभाग्य शिखरचंद, कमल कुमार, किशोर कुमार, अजय कुमार, संजय कुमार संगही परिवार को प्राप्त हुआ। विनयांजलि आचार्य श्री के परम भक्त धर्मचंद संगही ने प्रस्तुत की। मंच संचालन दिल्ली से पधारी डॉ. इंदु जैन एवं संजय बड़जात्या ने किया तथा तारा देवी ने सीकर चातुर्मास आगमन पर भजन प्रस्तुत किया।
सीकर संघ स्तुति योग्य है: आचार्य श्री
धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने कहा कि गुरु पूर्णिमा हमें सिखाती है कि ज्ञान तभी फलित होता है जब भीतर का अहंकार समाप्त हो जाए। उन्होंने जीवन में सच्चे गुरु के महत्व और आत्म-कल्याण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि सीकर संघ स्तुति योग्य है क्योंकि यहां आचार्य श्री अजित सागर जी की मुनि दीक्षा और आचार्य श्री धर्म सागर जी की समाधि हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि पहले समाज की भावना थी कि आचार्य श्री के व्यक्तित्व के अनुरूप समाधि स्थल नहीं बना था, जिसे अब समाज ने जीर्णोद्धार कर पूर्ण करने का संकल्प लिया है। गुरु के प्रति श्रद्धा, भक्ति और समर्पण से हर कार्य सफल होता है।
देशभर से आए गुरु भक्त
सायंकाल में चातुर्मास स्थल स्थित धर्मसागर सभागार में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के जीवन पर बनी डॉक्यूमेंट्री का प्रसारण भी किया गया। इस अवसर पर सीकर जिले के धर्मावलंबियों के साथ कोलकाता, पारसोला, सनावद, सूरत, दिल्ली, टीकमगढ़, खंडवा, पड़वा, किशनगढ़, जयपुर, उदयपुर, प्रयागराज, बैंगलोर, गुवाहाटी, धरियाबाद, निवाई, डिमापुर सहित देशभर से जैन श्रद्धालु और प्रवासी समाजजन उपस्थित रहे।













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