बागेश्वर धाम के धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज की माताजी शोभादेवी के चरणों शीश रखकर वात्सल्य भाव से अपने सिर पर हाथ रखवा कर आशीर्वाद पाया।बागेश्वर धाम/कोडरमा से पढ़िए, राजकुमार जैन अजमेरा की यह खबर…
बागेश्वर धाम/कोडरमा। बागेश्वर धाम जी हां देश-विदेश का हर सनातनी जिनके दर्शन और चरणों की धूल पाने के लिए लालायित रहता है। ऐसे राष्ट्रीय संत बागेश्वर धाम के संत श्री धीरेंन्द्र शास्त्री महाराज ने आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज, जिन्होंने 596 दिन की मौन साधना और 498 दिन की निर्जल उपवास करने का विश्व रेकॉर्ड बनाया ऐसे संत की गृहस्थ अवस्था की माताजी शोभादेवी के चरणों शीश रखकर वात्सल्य भाव से अपने सिर पर हाथ रखवा कर आशीर्वाद पाया। निश्चित रूप से बागेश्वर धाम में श्रद्धा और सम्मान का अद्भुत संगम देखने को मिला। आध्यात्मिक जगत में उस समय भावनात्मक और प्रेरणादायी वातावरण निर्मित हो गया। शोभा देवी के दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
श्रद्धालुओं ने भारतीय संस्कृति में मातृशक्ति के सम्मान और संत परंपरा के प्रति श्रद्धा का प्रेरक उदाहरण बताया।
संत परंपरा के प्रति श्रद्धा का प्रेरक उदाहरण
इस अवसर पर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने विनम्र भाव से माताश्री का सम्मान करते हुए उनके चरणों में श्रद्धा अर्पित की तथा आशीर्वाद प्राप्त कर स्वयं को धन्य अनुभव किया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने इसे भारतीय संस्कृति में मातृशक्ति के सम्मान और संत परंपरा के प्रति श्रद्धा का प्रेरक उदाहरण बताया। बागेश्वर धाम देश ही नहीं, बल्कि विश्वभर में अपनी आध्यात्मिक पहचान स्थापित कर चुका है। करोड़ों श्रद्धालु बागेश्वर धाम से जुड़कर सनातन संस्कृति, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव कर रहे हैं। ऐसे में पूज्य माताश्री शोभा देवी के प्रति व्यक्त किया गया सम्मान सभी के लिए प्रेरणादायक संदेश बन गया। श्रद्धालुओं ने कहा कि संतों की जन्मदात्री माताओं का सम्मान वास्तव में उस तप, संस्कार और त्याग का सम्मान है, जिसके कारण समाज को महान संतों का सान्निध्य प्राप्त होता है।













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