आचार्य श्री वर्धमान सागर जी 36 साधु सहित बड़ के बालाजी में विराजमान हैं। आचार्य श्री विशद सागर जी से वर्ष 2005 में दीक्षित मुनि श्री विशालसागर जी, मुनि श्री विपिन सागर जी पदमपुरा से आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के दर्शन करने के लिए चंद्रपुरी बड़के बालाजी पधारे। जयपुर से पढ़िए, डॉ.राजेश पंचोलिया की रिपोर्ट…
जयपुर। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी 36 साधु सहित बड़ के बालाजी में विराजमान हैं। आचार्य श्री विशद सागर जी से वर्ष 2005 में दीक्षित मुनि श्री विशालसागर जी, मुनि श्री विपिन सागर जी पदमपुरा से आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के दर्शन करने के लिए चंद्रपुरी बड़के बालाजी पधारे। एक अद्भुत संयोग यहां उल्लेखनीय है कि जयपुर नगर गौरव मुनिश्री विशाल सागर जी एवं वर्ष 2006 में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से दीक्षित मुनि श्री हितेंद्र सागर जी गृहस्थ अवस्था के मित्र होकर चिरकाल से दीक्षित हैं। दीक्षा के बाद गृहस्थ अवस्था के मित्रों का लगभग 22वर्षों के बाद पहली बार साधु अवस्था में मिलन हुआ। इस दृश्य को देखकर हर कोई भाव विभोर हो गया।













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