अतिशयकारी क्षेत्र ग्राम बामंदी स्थित श्री चंद्रप्रभु दिंबर जैन मंदिर में मंगलवार को भक्ति, श्रद्धा और वात्सल्य का एक अलौकिक दृश्य देखने को मिला। धामनोद जैन समाज के ‘कपल ग्रुप’ के मन में अतिशयकारी भगवान चंद्रप्रभु के भव्य दर्शन, अभिषेक और शांतिधारा करने के पावन भाव जाग्रत हुए। इसी मंगल भावना के साथ पूरा समूह सुबह-सुबह बामंदी मंदिर जी पहुँचा। धामनोद से पढ़िए, दीपक प्रधान की यह रिपोर्ट…
धामनोद/बामंदी। परम पवित्र और अतिशयकारी क्षेत्र ग्राम बामंदी स्थित श्री चंद्रप्रभु दिंबर जैन मंदिर में मंगलवार को भक्ति, श्रद्धा और वात्सल्य का एक अलौकिक दृश्य देखने को मिला। धामनोद जैन समाज के ‘कपल ग्रुप’ के मन में अतिशयकारी भगवान चंद्रप्रभु के भव्य दर्शन, अभिषेक और शांतिधारा करने के पावन भाव जाग्रत हुए। इसी मंगल भावना के साथ पूरा समूह सुबह-सुबह बामंदी मंदिर जी पहुँचा। बामंदी तीर्थ क्षेत्र की चैतन्य और चमत्कारी ऊर्जा से सराबोर होकर धामनोद से आए सभी श्रद्धालुओं ने पूर्ण विधि-विधान और शुद्ध वस्त्रों में देवाधिदेव भगवान चंद्रप्रभु का पावन अभिषेक किया। इसके बाद विश्व शांति की कामना के साथ सुख-समृद्धि प्रदाता ‘शांतिधारा’ संपन्न की गई। अभिषेक के उपरांत, संगीतमय लहरियों के बीच श्री चंद्रप्रभु मंडल विधान का आयोजन किया गया। जिसमें सभी दंपतियों ने अर्घ्य समर्पित कर पुण्य अर्जन किया। आरती और भक्ति नृत्य के समय पूरा मंदिर प्रांगण चैतन्य चमत्कारी चंदाप्रभु भगवान की जय के गगनभेदी जयकारों से गुंजायमान हो उठा। इस धार्मिक मिलन के अवसर पर जैन समाज का पारस्परिक वात्सल्य भाव भी खुलकर सामने आया।
बामंदी जैन समाज द्वारा धामनोद के कपल ग्रुप का अत्यंत आत्मीय और भावभीना स्वागत-सम्मान किया गया। इस स्नेह से अभिभूत होकर धामनोद जैन समाज ग्रुप ने भी बामंदी जैन समाज के अध्यक्ष एवं समस्त प्रबुद्ध समाज जनों का आभार व्यक्त करते हुए उन्हें सम्मानित किया। धामनोद समाज के सदस्यों ने बामंदी मंदिर जी के दर्शन कर अपनी असीम प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यहां आकर मन को अद्भुत शांति मिली है और भगवान चंद्रप्रभु का अतिशय साक्षात महसूस होता है। सभी श्रद्धालुओं ने भगवान से प्रार्थना की कि उनका आशीष और कृपा दृष्टि संपूर्ण समाज पर सदैव बनी रहे। यह धार्मिक यात्रा जैन समाज की एकता, अटूट श्रद्धा और परस्पर वात्सल्य का एक अनुपम उदाहरण बनकर संपन्न हुई।













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