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समय रहते जाग जाओ, यह मनुष्य जीवन बार-बार नहीं मिलता : आर्यिका सिद्धश्री माताजी के प्रवचन में उमड़ा भक्त समुदाय


आचार्य श्री विनम्र सागर जी महाराज की सुयोग्य शिष्या आर्यिका श्री सिद्धश्री माताजी ससंघ इन दिनों नौगामा नगर में विराजमान हैं। सोमवार को माताजी के पावन सानिध्य में वागड़ के बड़े बाबा आदिनाथ भगवान तथा नेमिनाथ भगवान की भव्य शांतिधारा संपन्न हुई। नौगामा से पढ़िए, सुरेशचंद्र गांधी की यह रिपोर्ट…

 


नौगामा। आचार्य श्री विनम्र सागर जी महाराज की सुयोग्य शिष्या आर्यिका श्री सिद्धश्री माताजी ससंघ इन दिनों नौगामा नगर में विराजमान हैं। सोमवार को माताजी के पावन सानिध्य में वागड़ के बड़े बाबा आदिनाथ भगवान तथा नेमिनाथ भगवान की भव्य शांतिधारा संपन्न हुई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर पुण्य अर्जन किया। इसके उपरांत आयोजित धर्मसभा में आर्यिका सिद्धश्री माताजी का मंगल प्रवचन हुआ, जिसमें उन्होंने समय रहते जागने की प्रेरणा देते हुए कहा कि बीता हुआ समय कभी लौटकर नहीं आता और जीवन के जो पल एक बार गुजर गए, वे हमेशा के लिए चले गए। माताजी ने सचेत किया कि मनुष्य पहले बालक होता है, फिर युवा और अंत में बुजुर्ग हो जाता है, पर अक्सर लोग सोचते हैं कि आगे चलकर धर्म-ध्यान करेंगे, लेकिन वह अनुकूल समय फिर कभी नहीं आता। उन्होंने आगे कहा कि यह मनुष्य अवतार बहुत मुश्किल से और पूर्व जन्म के उत्कृष्ट पुण्यों के उदय से मिला है, इसलिए हमें इस जन्म में ऐसे श्रेष्ठ कार्य करने चाहिए जिससे हमारा अगला जन्म भी कल्याणकारी हो। कर्मों के सिद्धांत पर प्रकाश डालते हुए माताजी ने कहा कि यदि इस जीवन में बुरे कर्म करोगे तो नर्क गतियों में भटकना पड़ेगा और तिर्यंच (पशु-पक्षी) या पेड़-पौधे का जीवन पाकर जीवन कभी सफल नहीं हो सकता, क्योंकि व्यक्ति जो भी पाप करता है, उसका फल उसे स्वयं ही भुगतना पड़ता है; अतः हमें प्रतिपल अच्छे कर्म करने चाहिए। इस पावन अवसर पर उपस्थित जनसमुदाय द्वारा आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज, मुनिश्री सुधासागर जी महाराज तथा मुनिश्री विभवसागर जी महाराज के चरणों में भक्तिभाव से अर्घ्य समर्पित किया गया।

3 जून को समवशरण परिवार की ओर से आयोजित होने वाले ‘समवशरण मंदिर पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव’ के भव्य वार्षिक उत्सव के उपलक्ष्य में समाज के प्रतिनिधियों ने आर्यिका सिद्धश्री माताजी के सानिध्य में विशेष पूजन, शांतिधारा और अभिषेक संपन्न कराने हेतु श्रीफल भेंट कर भावभीना निवेदन किया।

 

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