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आत्मज्ञान के बिना जीव चलता फिरता शव: धर्माचार्य कनक नंदीजी ने भावपाहुड की गाथा 343 का रहस्य बताया


धर्माचार्य कनक नंदी गुरुदेव ने भिलुडा के पास शिवगौरी आश्रम से अंतरराष्ट्रीय वेबिनार में बताया कि आत्मज्ञान बिना यह जीव चलता फिरता शव है। समाधि तंत्र 61 से 66 की गाथाओं को समझाने के लिए भावपाहुड की गाथा 343 का रहस्य बताया। डडूका से पढ़िए, अजीत कोठिया की रिपोर्ट…


डडूका। धर्माचार्य कनक नंदी गुरुदेव ने भिलुडा के पास शिवगौरी आश्रम से अंतरराष्ट्रीय वेबिनार में बताया कि आत्मज्ञान बिना यह जीव चलता फिरता शव है। समाधि तंत्र 61 से 66 की गाथाओं को समझाने के लिए भावपाहुड की गाथा 343 का रहस्य बताया। जिस प्रकार वस्त्र नया पुराना पहनने से तुम नए पुराने नहीं बन जाते। जिस प्रकार हम गाड़ी में बैठते हैं, हम गाड़ी नहीं है वैसे ही आत्मा शरीर रूपी गाड़ी में बैठा है। तुम शुद्ध बुद्ध आनंद हो, यह आत्मा शिव है तथा तुम्हारा शरीर शव है। जीव रहित शरीर शव होता है वैसे ही सम्यक दर्शन रहित जीव शव है। इस लोक में शव अपूज्य है वैसे ही तुम्हारा शरीर आत्मज्ञान के बिना चलता फिरता शव है। परम आत्म ज्ञान बिना जीव राजा महाराजा देव भोग भूमि आदि में जन्म ले लिया परंतु शव के समान है। मनुष्य जन्म में ही आत्मा का श्रद्धान ज्ञान आचरण जीव कर सकता है, अन्य जन्म में नहीं। गुरुदेव के पास पढ़ने वाले सभी शिष्यों ने स्वीकार किया कि आचार्य श्री के पास पढ़ने से पहले हम सभी शव थे क्योंकि आत्मा को नहीं जानते थे।

आत्मा कर्म से विमुक्त होने पर परमात्मा बन जाता है

आचार्य श्री कहते हैं गुण दोषो को जानकार सम्यक दर्शन को धारण करो। यह आत्मा कर्ता भोक्ता है। आत्मा कर्म से विमुक्त होने पर परमात्मा बन जाता है जिससे ज्ञानी बुद्ध चतुर्मुख सर्वज्ञ ब्रह्मा शिव बन जाता है। राजा भी युद्ध क्षेत्र में सामायिक प्रतिक्रमण करते थे उन्हें अन्य लोग उस समय कायर समझते थे। परंतु जब युद्ध करते थे तो शत्रु को परास्त कर देते थे। जब व्यक्ति आनंद से मूर्छित हो जाता है तब उसके मुख से वचन नहीं निकलता वैसे ही जब दुख से अधिक दुखी हो जाता है तो भी उसके मुख से वचन नहीं निकलता है। बाल ब्रह्मचारी जी वर्ण भैया ने आचार्य श्री की रचित कविता ‘खाना पीना सोना जागन ही जीव का काम नहीं है। राग, द्वैष, काम, मोह कोई भाव श्रेय नहीं है।’ के माध्यम से मंगलाचरण किया।

कार्यक्रम मेें यह समाजजन उपस्थित रहे

इस अवसर पर मुनि श्री सुविज्ञ सागर जी, अध्यात्म नंदी, सौम्यनंदी, सुवत्सलमती माताजी, भक्ति श्री माताजी, ब्रह्मचारिणी मंजू दीदी, गुणमाला देवी, मनीष भैया, खुशबू, संगीता, विदुषी, ममता, टीना, पीना, प्रतिभा, राजू देवी, श्रीपालजी, अरविंद, धनपालज, कमलेश, ओमप्रकाश, शैलेंद्र, सारिका भट्ट, रामजी भाई का परिवार भीलुड़ा, खोडन, पुनर्वास कॉलोनी आदि अनेक लोग उपस्थित थे। यह जानकारी विजयलक्ष्मी गोदावत सागवाड़ा ने दी।

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