मुनिश्री विमलसागर जी ने कहा-मनुष्य पर्याय मिली, देव, शास्त्र, गुरु, का सानिध्य मिला उसे व्यर्थ मत गंवाओ। मनुष्य जन्म को सार्थक करने के लिए प्रतिदिन भगवान के श्री चरणों में श्रद्धा, विवेक और संकल्प के साथ उत्तम से उत्तम वस्तु,(द्रव्य सामग्री एवं श्रीफल) समर्पित कर दर्शन कर पुण्य अर्जन करें। इंदौर से पढ़िए, यह खबर…
इंदौर। मनुष्य पर्याय मिली, देव, शास्त्र, गुरु, का सानिध्य मिला उसे व्यर्थ मत गंवाओ। मनुष्य जन्म को सार्थक करने के लिए प्रतिदिन भगवान के श्री चरणों में श्रद्धा, विवेक और संकल्प के साथ उत्तम से उत्तम वस्तु,(द्रव्य सामग्री एवं श्रीफल) समर्पित कर दर्शन कर पुण्य अर्जन करें। जो श्रावक इस विधि से देव दर्शन अभिषेक पूजन करते हैं उनके पापों का क्षय होता है और उनके पुण्य और वैभव में वृद्धि होती है। यह उद्गार आज दिगंबर जैन आदिनाथ जिनालय छत्रपति नगर में आयोजित मान स्तंभ महा मस्तकाभिषेक के पूर्व मुनि श्री विमल सागर जी महाराज ने व्यक्त किए। मुनिश्री अनंतसागर जी महाराज भी उपस्थित थे। इस अवसर पर 45 फीट ऊंचे मान स्तंभ के तीन खंड में विराजित चतुर्मुखी प्रतिमाओं का स्वर्ण रजत कलशों से अभिषेक हुआ।
प्रथम द्वितीय कलश एवं शांतिधारा करने का सौभाग्य रमेशचंद जैन बीना वाले, श्रुत जैन केवलारी, भूपेंद्र वीरेंद्र जैन देवरी वाले हीरालाल शाह, विपुल बांझल, राजेश जैन दद्दू, डॉ. प्रदीप बांझल, सचिन जैन, अरविंद अखिलेश सोधिया आदि ने प्राप्त किया। राजेश जैन दद्दू ने बताया कि इस अवसर पर जिनालय वेदी में दो नवीन प्रतिमाएं भी विराजमान की गईं। सभी क्रिया विधि विधान के साथ हुईं।













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