जैन धर्म के 20वें तीर्थंकर भगवान मुनि सुव्रतनाथ जी का ज्ञान कल्याणक 11 अप्रैल को वैशाख कृष्ण नवमी को शहर सहित देशभर के दिगंबर जैन मंदिरों में धार्मिक उल्लास और अपार श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। श्रीफल जैन न्यूज की विशेष शृंखला में आज पढ़िए, उपसंपादक प्रीतम लखवाल की यह संकलित और संपादित प्रस्तुति…
इंदौर। जैन धर्म के 20वें तीर्थंकर भगवान मुनि सुव्रतनाथ जी का ज्ञान कल्याणक 11 अप्रैल को वैशाख कृष्ण नवमी को शहर सहित देशभर के दिगंबर जैन मंदिरों में धार्मिक उल्लास और अपार श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। इस दिन भगवान का अभिषेक, शांतिधारा, शांतिधारा पाठ सहित अन्य विधि-विधान किए जाएंगे। भगवान मुनिसुव्रतनाथ जी का ज्ञान कल्याणक एक महत्वपूर्ण जैन त्योहार है, जो भगवान मुनि सुव्रतनाथ जी के ज्ञान प्राप्ति का प्रतीक है। भगवान मुनि सुव्रतनाथ का जन्म राजगृह में हुआ था। उनके पिता का नाम सुमित्र और माता का नाम पद्मावती था। भगवान मुनि सुव्रतनाथ जी ने अपने जीवन में कई महत्वपूर्ण कार्य किए, जिनमें से एक था ज्ञान प्राप्ति। जैन धर्म के 20वें तीर्थंकर भगवान मुनिसुव्रतनाथ जी ने वैशाख कृष्ण नवमी तिथि को बिहार के राजगृह (राजगीर) स्थान पर नील वन (या नील उद्यान) में, चंपक (चंपा) वृक्ष के नीचे को कैवल्यज्ञान (सर्वाेच्च ज्ञान) प्राप्त किया था।
’ज्ञान कल्याणक का महत्व
भगवान मुनि सुव्रतनाथ जी का ज्ञान कल्याणक हमें ज्ञान की महत्ता को समझने का अवसर प्रदान करता है। यह त्योहार हमें ज्ञान प्राप्ति के लिए प्रेरित करता है और हमें अपने जीवन में ज्ञान को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करता है। भगवान मुनि सुव्रतनाथ जी का ज्ञान कल्याणक जैन समुदाय में बहुत उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन दिगंबर जैन मंदिरों में पूजा-अर्चना की जाती है और भगवान मुनि सुव्रतनाथ जी की प्रतिमा को सजाया जाता है। लोग अपने घरों में भी पूजा-अर्चना करते हैं और भगवान मुनि सुव्रतनाथ जी की जयकार करते हैं। दिगंबर जैन समाज में भगवान के ज्ञान कल्याण को लेकर अपार उल्लास और उत्साह है।













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