जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी की जयंती के अवसर पर जैन समाज अंबाह, दिगंबर जैन सोशल ग्रुप एवं जैन मिलन अंबाह के तत्वावधान में बीती रात जैन बगीची में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक रंग और सामाजिक सहभागिता का अद्भुत संगम देखने को मिला। पढ़िए अजय जैन की रिपोर्ट…
अंबाह। जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी की जयंती के अवसर पर जैन समाज अंबाह, दिगंबर जैन सोशल ग्रुप एवं जैन मिलन अंबाह के तत्वावधान में बीती रात जैन बगीची में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक रंग और सामाजिक सहभागिता का अद्भुत संगम देखने को मिला। बड़ी संख्या में समाजजन, महिलाएं, युवा एवं बच्चे उपस्थित रहे, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय और उत्साहपूर्ण बना रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान महावीर स्वामी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात मंच पर भगवान महावीर के जीवन, त्याग, तप और उनके सिद्धांतों पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का क्रम प्रारंभ हुआ। राजुल जैन, साक्षी जैन, शैंकी जैन, सिमरन जैन एवं राखी जैन के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में बच्चों ने अभिनय, नृत्य और भाव-भंगिमाओं के माध्यम से भगवान महावीर के जीवन-दर्शन को जीवंत कर दिया।
कार्यक्रम के दौरान आकर्षक मंच सज्जा, प्रभावी प्रकाश व्यवस्था और सुसज्जित ध्वनि प्रणाली भी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। इस अवसर पर मयूर बैंड, इटावा के कलाकारों ने भी अपनी शानदार प्रस्तुतियों से कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए।
सांस्कृतिक कार्यक्रम में नन्हे-मुन्ने बच्चों द्वारा प्रस्तुत किए गए भजन और नृत्य दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण रहे। “मेरे महावीर झूले पालना”, “बजे कुंडलपुर में बधाई”, “वर्तमान को वर्धमान की आवश्यकता है”, “महावीर तुम्हारा क्या कहना”, “वीर प्रभु तुम हो महान”, “जय-जय वर्धमान प्रभु”, “अहिंसा के दाता महावीर”, “महावीर आए द्वार हमारे”, “प्रभु वर्धमान का जयकारा”, “शांति के दूत महावीर” तथा “वर्धमान वंदना” जैसे भजनों पर प्रस्तुतियों ने समां बांध दिया। दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ बच्चों का उत्साहवर्धन किया। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से भगवान महावीर के सिद्धांत—अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह और संयम—को प्रभावी रूप से समाज के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ समाजसेवी नरेश जैन ‘गुरु’ एवं शिक्षक वीरेंद्र जैन ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में भगवान महावीर के अहिंसा, सत्य और अपरिग्रह के सिद्धांत अत्यंत प्रासंगिक हो गए हैं। उन्होंने कहा कि भारत अपनी संस्कृति और संस्कारों के बल पर विश्व को शांति और सहअस्तित्व का संदेश दे रहा है। जब दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध और हिंसा का वातावरण बना हुआ है, ऐसे समय में भगवान महावीर की शिक्षाएं मानवता को नई दिशा प्रदान कर रही हैं।
वहीं समाजसेवी महेश चंद जैन (एमपीईबी) ने कहा कि आज विश्व अनेक संकटों से गुजर रहा है, जिनमें पर्यावरण असंतुलन, सामाजिक असमानता और नैतिक पतन प्रमुख हैं। ऐसे समय में हमारे तीर्थंकरों की शिक्षाएं न केवल मार्गदर्शक हैं, बल्कि समाधान का आधार भी हैं। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान उसकी आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक मूल्यों में निहित है। आधुनिकता जहां शरीर है, वहीं आध्यात्मिकता उसकी आत्मा है। यदि जीवन में त्याग, संयम और सदाचार का समावेश नहीं होता, तो बड़े से बड़ा विचार भी निष्प्रभावी हो जाता है। यही जीवन-दृष्टि भगवान महावीर ने सदियों पहले मानव समाज को प्रदान की थी।
आयोजन संयोजक संतोष जैन ने अपने संबोधन में कहा कि जैन धर्म का मूल उद्देश्य विश्व में सुख, शांति और आनंद की स्थापना करना है। आज मानवता एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां उसे महावीर और महाविनाश के बीच चयन करना है। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर का जीवन-दर्शन युगों-युगों से मानवता का मार्गदर्शन करता आया है और आगे भी करता रहेगा। यदि हम उनके सिद्धांतों को अपने जीवन में उतार लें, तो पर्यावरण संकट, ग्लोबल वार्मिंग और सामाजिक तनाव जैसी समस्याओं का समाधान सहज रूप से संभव हो सकता है।
उन्होंने आगे कहा कि भगवान महावीर का जन्म केवल एक व्यक्ति का जन्म नहीं, बल्कि समस्त सद्गुणों, नैतिक मूल्यों और मानवता के मंगल का प्रतीक है। उन्होंने समाज को जातिवाद, भेदभाव और कुरीतियों से मुक्त करने का संदेश दिया तथा वैभव से वैराग्य की ओर अग्रसर होकर त्याग और तपस्या का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया। उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने हजारों वर्ष पहले थे और आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करते रहेंगे।
कार्यक्रम के अंत में दिगंबर जैन सोशल ग्रुप के अध्यक्ष एवं संयोजक संतोष जैन ने सभी उपस्थित जनों, सहयोगकर्ताओं एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। लगभग चार घंटे तक चले इस कार्यक्रम में लकी ड्रा के माध्यम से आकर्षक पुरस्कार वितरित किए गए तथा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देने वाली बालिकाओं को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में समाज के अनेक सदस्यों का विशेष योगदान रहा, जिनकी सराहना की गई।













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