मोह-माया का त्याग कर संयम और साधना के पथ पर अग्रसर होने का दुर्लभ अवसर इस बार इंदौर के परिवहन नगर में श्रद्धालुओं को प्राप्त होगा। यहां 20 से 22 जुलाई तक “भव्य दीक्षा महोत्सव” का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें परिवार और समाज की लाडली मंजू दीदी जैन दीक्षा ग्रहण कर आर्यिका जीवन में प्रवेश करेंगी। इंदौर से पढ़िए, यह विशेष खबर…
इंदौर। मोह-माया का त्याग कर संयम और साधना के पथ पर अग्रसर होने का दुर्लभ अवसर इस बार इंदौर के परिवहन नगर में श्रद्धालुओं को प्राप्त होगा। यहां 20 से 22 जुलाई तक “भव्य दीक्षा महोत्सव” का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें परिवार और समाज की लाडली मंजू दीदी जैन दीक्षा ग्रहण कर आर्यिका जीवन में प्रवेश करेंगी। यह मंगल आयोजन महावीर दिगम्बर जैन मंदिर, परिवहन नगर में आचार्य श्री सिद्धांत सागर जी महाराज के परम सान्निध्य में संपन्न होगा। आचार्य श्री के आशीर्वाद से यह तीन दिवसीय वैराग्य उत्सव धर्म, त्याग और भक्ति का अनुपम उदाहरण बनेगा।
मेहंदी और गोद भराई हुई
आयोजकों के अनुसार दीक्षा महोत्सव का शुभारंभ 20 जुलाई सोमवार को दोपहर 2 बजे मेहंदी एवं हल्दी रस्म के साथ हुआ। यह मांगलिक उत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। शाम 7 बजे भावभीनी गोद भराई का कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें समाज की महिलाओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
बिनौली मंगलवार को
दूसरा दिन 21 जुलाई, मंगलवार को अत्यंत विशेष रहेगा। प्रातः 8 बजे भव्य नगर भ्रमण निकाला जाएगा। इसे बिनौली या वैराग्य जुलूस के नाम से भी जाना जाता है। जुलूस में श्रद्धालु दीदी के वैराग्य भाव की अनुमोदना करते हुए चलेंगे। संध्या काल में 48 दीपकों से महाप्रभाविक भक्तांबर स्तोत्र का पाठ किया जाएगा। दीपों की पंक्तियों से मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठेगा।
22 जुलाई को होगी दीक्षा
महोत्सव का मुख्य और अंतिम दिन 22 जुलाई बुधवार को होगा। प्रातः काल महावीर दिगम्बर जैन मंदिर में भव्य जैन दीक्षा समारोह आयोजित किया जाएगा। इस पवित्र बेला में मंजू दीदी दीक्षा विधि संपन्न कर संयम पथ पर आरूढ़ होंगी और सांसारिक जीवन का त्याग कर साध्वी जीवन स्वीकारेंगी।
वैराग्य उत्सव में पधारने का आग्रह
समाज अध्यक्ष नवनीत जैन काका एवं आयोजन समिति ने समाज के सभी श्रद्धालुओं से सपरिवार इस अभूतपूर्व वैराग्य उत्सव में पधारने का सादर आमंत्रण दिया है। समिति का कहना है कि दीदी के संयम मार्ग की सराहना कर इस पुण्यमयी वेला के साक्षी बनना प्रत्येक श्रद्धालु के लिए सौभाग्य की बात होगी।
दीक्षा आत्मकल्याण का सर्वोच्च मार्ग
जैन धर्म में दीक्षा को आत्मकल्याण का सर्वोच्च मार्ग माना जाता है। मंजू दीदी का यह निर्णय न केवल उनके परिवार के लिए गौरव का विषय है, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बनेगा। इंदौर के जैन समाज में इस दीक्षा को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है। तीनों दिन मंदिर परिसर में धार्मिक कार्यक्रम, भजन और प्रवचन का क्रम भी जारी रहेगा।













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