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प्रवचन एवं जिज्ञासा समाधान का आयोजन : जीवन का लक्ष्य बनाकर चलना है, तभी हम अपनी मंजिल पर पहुंच पाएंगे – मुनि श्री सुधासागर जी महाराज 


पारसनाथ दिगंबर जैन मंझार मंदिर में निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी महाराज एवं क्षुल्लक गंभीर सागर जी महाराज विराजमान हैं। प्रतिदिन मुनि श्री के प्रवचन एवं शाम को जिज्ञासा समाधान का आयोजन किया जा रहा है। इसके तहहत मुनि श्री ने जीवन के लक्ष्यों के बारे में बताया। पढ़िए राजीव सिंघई की विस्तृत रिपोर्ट…


टीकमगढ़। पारसनाथ दिगंबर जैन मंझार मंदिर में निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी महाराज एवं क्षुल्लक गंभीर सागर जी महाराज विराजमान हैं। प्रतिदिन मुनि श्री के प्रवचन एवं शाम को जिज्ञासा समाधान का आयोजन किया जा रहा है। बुधवार को मुनि श्री 8:30 बजे मंच पर विराजमान हुए। मुनि श्री के पाद प्रक्षालन एवं चित्र अनावरण एवं शास्त्र भेंट का कार्यक्रम संपन्न हुआ।

बिना लक्ष्य के बढ़ रहें आगे

मुनि श्री ने अपने प्रवचन में कहा कि हम रास्ते पर चल रहे हैं। चलने की अनुभूति हो रही है लेकिन हम मंजिल पर पहुंच नहीं पा रहे हैं। उसके दो कारण हो सकते हैं या तो हमें रास्ता पता नहीं है या हम व्यक्तियों की भीड़ के पीछे चल रहे हैं। भीड़ जहां जा रही है, मैं चला जा रहा हूं। लेकिन मैं ये नहीं सोच पा रहा हूं कि हमें जाना कहां है। हम लक्ष्य भटक रहे हैं। बिना लक्ष्य के आगे बढ़ते जा रहे हैं। मुनि श्री ने कहा कि या तो व्यक्ति अज्ञानता के कारण बिना लक्ष्य के आगे बढ़ता जा रहा है या फिर वह निकम्मा होता जा रहा है। हमें अपने जीवन का लक्ष्य बनाकर चलना है, तभी हम अपनी मंजिल पर पहुंच पाएंगे। बिना लक्ष्य के हम अपने जीवन में भटकते ही रहेंगे। यदि आपका बेटा ईमानदार है तो उसे अपनी तिजोरी की चाबी बिना मांगे दे देना। अगर बेटा शराबी, कबाड़ी, नशा करने वाला है तो उसको अपनी वसीयत नहीं देना चाहिए।

मुनि श्री ने कहा कि बेटा अच्छा है मेरी वसीयत लेने के बाद मुकरेगा नहीं, मेरी सेवा करेगा तो पिता की संपत्ति पर उसी का अधिकार बनता है। मुनि श्री ने कहा कि चाहे समाज का पद हो या परिवार का पद हो, इन पर किसी की बद्दुआ मत लेना। अगर समाज का पद है या किसी संस्था का पद है, समय होते ही उस पद को छोड़ देना। उस पद पर उस क्षेत्र पर अपना अधिकार नहीं जमाना। किसी का अभिशाप अपने ऊपर नहीं लेना। सामाजिक संस्थाएं हैं सबको कार्य करने का मौका मिले। हो सकता है व्यक्ति तुमसे अच्छा काम कर सके। इसलिए समय होते ही पदाधिकारियों को अपने पद को छोड़ देना चाहिए। दोपहर 2:00 से मंझार मंदिर के नव निर्माण के संबंध में मंदिर के ट्रस्टियों की मीटिंग आयोजित की गई।

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