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अध्यात्म सरोवर राजहंस आचार्य भगवन विशुद्धसागरजी महाराजः ‘भ्रूण हत्या‘ नहीं करने का आव्हान 

 


पश्चिम महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले के शिरोल तहसील में नांदणी तीर्थक्षेत्र स्थित है। यहॉ शताब्दी देशनाचार्य आचार्य विशुद्ध सागरजी महाराज के प्रवचन सुनने देश-विदेश से हजारों श्रोता पहुंच रहे हैं। नांदणी में हजारों की संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने भ्रूण हत्या को रोकने के लिए संकल्प लिया। पढ़िए नांदणी (महाराष्ट्र) की पूरी खबर…


नांदणी। धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि पश्चिम महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले के शिरोल तहसील में नांदणी तीर्थक्षेत्र स्थित है। वीर सेवादल के अध्यक्ष बाळासाहेबजी पाटील ने कहा की अतिशय क्षेत्र नांदणी अनेक ऋषि-मुनियों कीे तपस्या से पावन तथा प्राचीन मूर्ति के लिए सुविख्यात यह प्राचीन तीर्थक्षेत्र अनेकानेक लोगों की श्रद्धा का केन्द्र है।

नांदणी मठ का इतिहास 1300 वर्ष पुराना

जैन धर्म के विकास और संरक्षण के हेतू भारतवर्ष में भट्टारक पीठों की निर्मिती हुई है। इन सभी भट्टारक पीठों में स्वस्तिश्री जिनसेन भट्टारक पट्टाचार्य महास्वामी मठसंस्थान नांदणी, करवीर (कोल्हापुर) यह आद्य पीठ है। प्राचीन भारत के दिल्ली, पिनगोंडी, जिनकंची और करवीर (नांदणी) ऐसी जिनसेन मठ की परंपरा चलती आ रही है। करवीर मठ संस्थान के कोल्हापुर, नांदणी, तेरदाळ और बेलगांव यह चार शाखापीठ है; इसलिये जिनसेन मठ का वास्तू अति भव्य है। नांदणी स्थित मठ का इतिहास 1300 वर्ष पुराना है।

जिनबिम्ब पंचकल्याण महोत्सव 

नांदणी मठ के आधीपत्य में दक्षिण महाराष्ट्र और उत्तर कर्नाटक के 743 गांव समाविष्ट है। इन सभी गांव में जैन धर्म के सभी धार्मिक महोत्सव, विधिविधान, पंचकल्याणक, धर्म का प्रसार एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम स्वस्तिश्री जिनसेन भट्टारक पट्टाचार्य महास्वामीजी के आदेश से और आशीर्वाद से सानंद संपन्न होते है। स्वस्तिश्री भट्टारक पट्टाचार्य जिनसेन महास्वामीजी के संरक्षण में अतिप्राचीन धर्मपीठ नांदणी में पट्टाचार्य आचार्य विशुद्ध सागरजी महाराज ससंघ के सानिध्य में जिनबिम्ब पंचकल्याण महोत्सव चल रहा है। मठ में प्राचीन धरोहर की समृद्धी इसमे झलकती है।

समाजजन को संकल्प दिलाया 

शताब्दी देशनाचार्य आचार्य विशुद्ध सागरजी महाराज के प्रवचन सुनने देश विदेश से हजारों श्रोता पहुंच रहे हैं आचार्य विशुद्धसागरजी महाराज ने अपनी देशना में समाजजन को संकल्प दिलाया कि भ्रूण हत्या नहीं करेंगे और न करने देंगे। गुरु देव ने कहा कि जो स्वयं जीता है और वह दूसरों को जीने देता है। वह सबका रक्षक बन परमात्मा पद को पाता है। इसीलिए भगवान महावीर स्वामी ने अपने संदेश में कहा है कि ‘जिओ और जीने दो‘। आचार्य विशुद्ध सागर महाराज जी ने नांदणी में हजारों की संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने इस भ्रूण हत्या को रोकने के लिए संकल्प लिया।

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