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भगवान आदिनाथ के मंदिर के प्रतिष्ठा महोत्सव की अद्वितीय छटा : श्री जिन मणि प्रभ सूरीश्वर जी ने शुभ मुहूर्त में करवाई प्रतिष्ठा 


शहर के बाजार नं. 3 में 7 महीने 7 दिन की अल्प अवधि में सफेद मार्बल से 42 फिट ऊँचे शिखरबंद मंदिर की मुख्य वेदी (मूल गंभारे) में भगवान आदिनाथ, भगवान पार्श्वनाथ, भगवान महावीर स्वामी और भगवान सुमतिनाथ को शुभ मुहूर्त सुबह 8:33 बजे विराजमान करवाया गया। रामगंजमंडी से अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह रिपोर्ट…


रामगंजमंडी। शहर के बाजार नं. 3 में 7 महीने 7 दिन की अल्प अवधि में सफेद मार्बल से 42 फिट ऊँचे शिखरबंद मंदिर की मुख्य वेदी (मूल गंभारे) में भगवान आदिनाथ, भगवान पार्श्वनाथ, भगवान महावीर स्वामी और भगवान सुमतिनाथ को शुभ मुहूर्त सुबह 8:33 बजे विराजमान करवाया गया। आचार्य श्रीजिन मणि प्रभ सूरीश्वर जी ने पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना करके इस पुनीत कार्य को संपन्न किया। इसी के साथ मंदिर परिसर में 70 वर्ष प्राचीन स्थापित तीनों भगवान, गौतम स्वामी, भोमियाजी, चक्रेश्वरी देवी, सच्चियाय माता, क्षेत्रपाल भैरूजी और जिनेश्वर सूरीजी की प्रतिमाओं को पूरे विधि-विधान से विराजमान करवाया।

42 फिट ऊँचे शिखर पर ध्वजा फहराई गई

शुभ मुहूर्त में ही 42 फिट ऊँचे शिखर पर 151 इंच ध्वजा दंड पर 131 इंच लम्बी ध्वजा आचार्य श्री मणि प्रभ सूरीश्वर जी की निश्रा में चढ़ाई गई। ध्वजा का लाभ मनीष लोढ़ा परिवार (सूरत वालों) ने लिया और शिखर पर मुख्य कलश का लाभ मोहित नाहर (सूरत वालों) ने लिया। विराजमान करवाने के मुख्य लाभार्थीयों में भगवान आदिनाथ के पारसमल कोठारी परिवार, इन्दौर, भगवान पार्श्वनाथ के चंपालाल शाह परिवार, सांचोर, भगवान महावीर स्वामी के सुभाष बाफना परिवार, रामगंजमंडी और भगवान सुमतिनाथ के लाभार्थी बसंतीलाल डागा परिवार रहे।

रामगंजमंडी की प्रतिष्ठा का दृश्य मेरी आँखों में तैर रहा है

प्रतिष्ठा महोत्सव इतना हर्ष उल्लास एवं उमंग से हुआ कि प्रतिष्ठा महोत्सव के बाद प्रवचन में आचार्य श्री मणिप्रभ सूरीश्वर ने कहा कि रामगंजमंडी मंदिर की प्रतिष्ठा का दृश्य मेरी आँखों में तैर रहा है। आचार्य श्री ने अंजनशलाका का महत्व बताते हुए कहा कि इसमें प्रतिमा में प्राण प्रवाहित किए जाते हैं। अंजन शलाका होने के बाद प्रतिमा, प्रतिमा नहीं रहती बल्कि भगवान बन जाती है। ट्रस्ट अध्यक्ष राजकुमार पारख को इंगित करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि अगर मुझे मालूम होता कि रामगंजमंडी के लोग और सारे संघ इतने धार्मिक और अच्छे हैं तो मैं बीकानेर की जगह अंजनशलाका रामगंजमंडी में ही करवाता। आचार्य श्री ने कहा कि भगवान को विराजमान करने के बाद यहां के लोगों की जिम्मेदारियां भी बढ़ गई हैं। सौंदर्य और सुगंध का उदाहरण देते हुए मणिप्रभ सूरीश्वरजी ने कहा कि सौंदर्य को दूर से देखा जा सकता है, लेकिन सुगंध के लिये पास जाना पड़ता है। उसी तरह सिर्फ भगवान की प्रतिमा का सौंदर्य देखना हो तो दूर से दर्शन किये जा सकते हैं, लेकिन भगवान के गुणों की सुगंध प्राप्त करनी हो तो स्पर्श और पूजा जरूरी है। पत्रकारों को इंगित करते हुए आचार्य मणिप्रभ सूरीश्वर जी ने कहा कि यहाँ के पत्रकारों ने सिर्फ अपना कर्तव्य ही नहीं निभाया वरन परमात्मा के प्रति अपनी भक्ति भी दिखाई है।

सभी धर्मों के लोग तारीफ के काबिल 

आचार्य श्री ने कहा कि पूरे प्रतिष्ठा महोत्सव में श्वेताम्बर, स्थानकवासी, तेरापंथी, दिगंबर समाज ने मिलकर जो मिसाल पेश की – और रामगंजमंडी के प्रत्येक समाज ने होल्डिंग, बैनर, कट आउट लगाकर और शोभा यात्रा में शामिल होकर एकता की जो मिसाल पेश की उसकी मैं प्रशंसा करता हूँ।

 पारख को संघ भूषण की उपाधि मिली

श्रीआदिनाथ जैन श्वेताम्बर श्री संघ द्वारा अध्यक्ष राजकुमार पारख को आचार्य श्री जिन मणिप्रभ सूरीश्वरजी म.सा. ने संघ भूषण की पदवी से अलंकृत किया। साथ ही उनकी बेटी पूर्व पार्षद खरतरगच्छ महिला परिषद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य साक्षी पारख की जमकर तारीफ की और राजेंद्र रांका, गौरव बापना, रवि बापना, दिलीप तिल्लानी, सुशील गोखरू, महेन्द्र डांगी सहित पूरे जैन समाज की सराहना की। धर्म सभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री ने भावुक शब्दों में कहा कि मैं रामगंजमंडी से जाते हुए साथ में भाता के रूप में रामगंजमंडी के लोगों का प्रेम, श्रद्धा और सम्मान लेकर जा रहा हूँ। राजकुमार पारख का श्री आदिनाथ जैन श्वेताम्बर ट्रस्ट, और माँ फलोदी धाम की तरफ से भी सम्मान किया गया। धर्म सभा को वर्धमान स्थानकवासी संघ के मंत्री प्रखर वक्ता, अजीत पारख और अर्चना कोठारी इंदौर ने भी संबोधित किया।

गुरुवार को होगा द्वार उद्घाटन 

नवनिर्मित मंदिर का गुरुवार को द्वार उद्घाटन होगा। जिसका लाभ पारख परिवार ने लिया है। उद्घाटन के बाद बाद यह मंदिर सभी के लिये दर्शन और पूजा के लिए खुल जाएगा।

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