तपती गर्मी में मूक पक्षियों की प्यास बुझाने के संकल्प के साथ शुरू हुआ राष्ट्रीय खंडेलवाल (सरावगी) दिगंबर जैन महिला संगठन का निशुल्क सकोरा वितरण अभियान अब एक जन-आंदोलन का रूप ले चुका है।
इंदौर। तपती गर्मी में मूक पक्षियों की प्यास बुझाने के संकल्प के साथ शुरू हुआ राष्ट्रीय खंडेलवाल (सरावगी) दिगंबर जैन महिला संगठन का निशुल्क सकोरा वितरण अभियान अब एक जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। अभियान के अंतिम चरण के समापन के बाद भी शहर के विभिन्न क्षेत्रों और मंदिरों से सकोरों की लगातार आ रही मांग इस बात का प्रमाण है कि जीवदया के प्रति समाज में एक नई चेतना जागृत हुई है।

संस्कारों से उपजी करुणा
संगठन के संस्थापक संदीप-शीतल पहाड़िया और अध्यक्ष ज्योति सेठी ने बताया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य लोगों को जीवदया के प्रति संवेदनशील बनाना था, जिसमें हम सफल होते दिख रहे हैं। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी में बेजुबान पक्षियों के दर्द को समझने के लिए करुणा और वात्सल्य की आवश्यकता होती है। जैन धर्म में ये गुण जन्मजात संस्कारों के रूप में मिलते हैं, जिसका परिणाम आज देशभर में जैन समाज द्वारा की जा रही निस्वार्थ सेवा के रूप में दिखाई दे रहा है।
कांच मंदिर में वितरण और संकल्प
इसी सेवा क्रम को आगे बढ़ाते हुए शुक्रवार को कांच मंदिर बहु मंडल, इतवारिया बाजार के संयोजन में कांच मंदिर परिसर में निशुल्क सकोरों का वितरण किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पक्षियों के लिए सकोरे प्राप्त किए और उनकी देखरेख का संकल्प लिया।
महिला संगठन का अटूट विश्वास
जीवदया के इस महायज्ञ में सक्रिय भागीदारी निभाने वाली दीपाली सोगानी, दीपाली पाटनी, पुष्पा काला, हिमाली अजमेरा, दीपिका गंगवाल, मोनिका जैन, सोनल पहाड़िया नकुल पाटोदी और पूजा कासलीवाल ने समाज का आभार व्यक्त किया। महिला संगठन की इन पदाधिकारियों ने विश्वास दिलाया कि समाज की सभी महिला इकाइयां एकजुट होकर भविष्य में भी इसी तरह के सेवा कार्य निरंतर जारी रखेंगी, जहाँ भी जरूरत होगी संगठन सदैव तत्पर रहेगा। यह अभियान न केवल पक्षियों की प्यास बुझा रहा है, बल्कि समाज को यह संदेश भी दे रहा है कि मानवता वही है जो मूक प्राणियों के प्रति भी संवेदनशील रहे।













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