आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने सोमवार को श्री आदिनाथ जिनालय में प्रवचन में कहा कि मंदिर बनाना निश्चित ही पुण्य का कार्य है,लेकिन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है मंदिर का संरक्षण और उसका सही उपयोग करना। जयपुर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर…
जयपुर। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने सोमवार को श्री आदिनाथ जिनालय में प्रवचन में कहा कि मंदिर बनाना निश्चित ही पुण्य का कार्य है लेकिन, उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है मंदिर का संरक्षण और उसका सही उपयोग करना। देश के राज्यों और नगरों में मंदिरों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वास्तव में वहां बैठकर आत्म चिंतन करना चाहिए। सुरेश सबलावत के अनुसार आचार्य श्री ने कहा कि भगवान मंदिर में विराजमान हैं। उन्होंने तप, त्याग और साधना से अपने कर्मों का नाश कर अनंत गुण प्राप्त किए लेकिन, हम 5 मिनट भी शांति से बैठकर यह विचार नहीं कर पाते कि हमें अपने जीवन को कैसे सुधारना है।

सिर्फ मंदिर बनाना ही धर्म नहीं है,मंदिर में समय देकर धार्मिक क्रियाओं, अभिषेक, पूजन, स्वाध्याय, तप से आत्मा की ओर लौटना ही सच्चा धर्म है। इसके पूर्व मुनि श्री प्रभव सागर जी ने उपदेश में सुख और दुःख की विवेचना की। मध्यप्रदेश धार जिले के अतिशय क्षेत्र कागदीपुरा में पंच कल्याणक के लिए विहार करने के लिए विनय छाबड़ा, इंजीनियर आशीष जैन, अजित छाबड़ा, श्रेणिक गंगवाल सहित अनेक श्रावकों ने दर्शन कर श्रीफल भेंट किया।













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