विश्व णमोकार महामंत्र दिवस के अवसर पर परेड स्थित जैन मंदिर में जैन समाज द्वारा सामूहिक जाप का भव्य आयोजन किया गया। इस आध्यात्मिक अनुष्ठान में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर णमोकार महामंत्र का जाप किया और विश्व शांति, आत्मशांति तथा सद्भावना की कामना की। अंबाह से पढ़िए, अजय जैन की यह खबर…
अंबाह। विश्व णमोकार महामंत्र दिवस के अवसर पर परेड स्थित जैन मंदिर में जैन समाज द्वारा सामूहिक जाप का भव्य आयोजन किया गया। इस आध्यात्मिक अनुष्ठान में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर णमोकार महामंत्र का जाप किया और विश्व शांति, आत्मशांति तथा सद्भावना की कामना की। मंदिर परिसर में भक्ति, अनुशासन और सकारात्मक ऊर्जा का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। कार्यक्रम की शुरुआत भगवान पार्श्वनाथ की विधिवत पूजा-अर्चना के साथ हुई। इसके पश्चात श्रद्धालु अनुशासनपूर्वक एक स्थान पर बैठकर लगभग डेढ़ घंटे तक एक स्वर में णमोकार महामंत्र का जाप करते रहे। इस दौरान पूरे परिसर में गूंजते मंत्रोच्चार ने वातावरण को आध्यात्मिकता से सराबोर कर दिया। श्रद्धालुओं का मानना है कि इस महामंत्र के जाप से आत्मिक शांति प्राप्त होती है और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है।
100 से अधिक मेगा इवेंट्स हुए
कार्यक्रम के दौरान महेशचंद जैन एमपीईबी ने बताया कि यह आयोजन विश्व शांति, आत्मिक संतुलन, सद्भावना और आध्यात्मिक कल्याण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (जीतो) संस्था द्वारा वैश्विक स्तर पर आयोजित किया जाता है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष के आयोजन में 180 से अधिक देशों के लाखों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। विश्वभर में 100 से अधिक मेगा इवेंट्स तथा 6000 से अधिक मंदिरों एवं विभिन्न स्थलों पर सामूहिक जाप किया गया, जो इस आध्यात्मिक अभियान की व्यापकता को दर्शाता है।
नियमित जाप से व्यक्ति के आभामंडल की शुद्धि होती है
दिगंबर जैन सोशल ग्रुप के अध्यक्ष संतोष जैन ने बताया कि णमोकार महामंत्र केवल आस्था का विषय ही नहीं, बल्कि अनुभव का भी विषय है। यह मंत्र आत्मा के गहनतम स्तर को स्पर्श करता है, जहां से चेतना की शुद्ध धारा प्रवाहित होती है। सामूहिक जाप के दौरान श्रद्धालुओं ने मानसिक शांति, स्थिरता और आंतरिक संतुलन का अनुभव किया। इससे तनाव, भय और अवसाद जैसी समस्याओं में कमी आती है और मन में सकारात्मकता का संचार होता है। अमित जैन टकसारी के अनुसार, इस मंत्र के नियमित जाप से व्यक्ति के आभामंडल की शुद्धि होती है, जिससे उसकी ऊर्जा सकारात्मक और प्रभावशाली बनती है। कई श्रद्धालुओं ने अनुभव साझा करते हुए बताया कि इसके प्रभाव से स्वास्थ्य में सुधार हुआ है और विभिन्न रोगों में राहत मिली है। उन्होंने कहा कि सकारात्मक कंपन शरीर की कोशिकाओं को संतुलित करते हैं, जिससे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
यह मंत्र कर्म निर्जरा की प्रक्रिया को तेज करता है
विकास जैन पाड़े ने कहा कि णमोकार महामंत्र संकल्प सिद्धि की शक्ति को भी बढ़ाता है। जब व्यक्ति शुभ संकल्प करता है, तो इस मंत्र के प्रभाव से वे संकल्प शीघ्र पूर्ण होने की दिशा में अग्रसर होते हैं। साथ ही, यह मंत्र कर्म निर्जरा की प्रक्रिया को तेज करता है, जिससे आत्मा की शुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति संभव होती है। उन्होंने कहा कि संसार में अनेक मंत्र हैं, किंतु विशेष रूप से गायत्री मंत्र और णमोकार महामंत्र को अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। णमोकार मंत्र जैन धर्म का मूल मंत्र होने के साथ-साथ आत्मा की शुद्धि और चेतना के उत्कर्ष का सार्वभौमिक सूत्र है। इसमें किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि उन सभी अरिहंतों और सिद्धों का स्मरण किया जाता है, जिन्होंने मोक्ष प्राप्त किया है।
मंत्र के प्रभाव से उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आए
उन्होंने बताया कि यह मंत्र सर्वकार्य सिद्धिकारक और लोकोत्तर माना जाता है। जहां लौकिक मंत्र केवल सांसारिक लाभ तक सीमित रहते हैं, वहीं णमोकार महामंत्र लौकिक और आध्यात्मिक दोनों प्रकार के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है। इसके नियमित स्मरण से भय, तनाव, दरिद्रता और विपत्तियों से मुक्ति के अनेक अनुभव सामने आए हैं। कई श्रद्धालुओं ने यह भी बताया कि इस मंत्र के प्रभाव से उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आए हैं और कठिन परिस्थितियों में भी उन्हें मानसिक बल प्राप्त हुआ है। ओपी जैन ने कहा कि णमोकार महामंत्र केवल एक धार्मिक मंत्र नहीं, बल्कि एक जीवनशैली है। यह “जिओ और जीने दो” के सिद्धांत को आत्मसात करने की प्रेरणा देता है।
विश्व में शांति, भाईचारे और समृद्धि के लिए सामूहिक प्रार्थना
अहिंसा, सह-अस्तित्व और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता जैसे मूल्यों को अपनाने के लिए यह मंत्र मार्गदर्शक का कार्य करता है। वर्तमान समय में जब दुनिया अशांति और संघर्षों से जूझ रही है, ऐसे में यह महामंत्र शांति और संतुलन का सशक्त माध्यम बन सकता है। इस अवसर पर शहर के विभिन्न जैन मंदिरों की समितियों, सामाजिक संगठनों और जैन समाज के पदाधिकारियों की सक्रिय सहभागिता रही। अंत में सभी श्रद्धालुओं ने देश और विश्व में शांति, भाईचारे और समृद्धि के लिए सामूहिक प्रार्थना की। साथ ही यह संकल्प लिया गया कि भविष्य में भी ऐसे आध्यात्मिक आयोजनों के माध्यम से समाज में सकारात्मकता, एकता और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा दिया जाएगा।













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