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ज़िंदगी में सफलता पाने का सबसे बड़ा मंत्र है कोशिश: मुनिश्री सर्वार्थ सागर जी ने भक्तों को प्रयास का महत्व बताया 


पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर महाराज ससंघ का चातुर्मास पथरिया में चल रहा है। यहां पर प्रतिदिन मुनिराजों के प्रवचन से माहौल धर्ममय हो रहा है। समाज के धर्मानुरागी भक्तजन यहां प्रवचन और धर्मसभा में ज्ञान के प्रकाश से आलोकित हो रहे हैं। पथरिया से पढ़िए, यह खबर…


पथरिया। पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज ससंघ का चातुर्मास पथरिया में चल रहा है। यहां पर प्रतिदिन मुनिराजों के प्रवचन से माहौल धर्ममय हो रहा है। समाज के धर्मानुरागी भक्तजन यहां प्रवचन और धर्मसभा में ज्ञान के प्रकाश से आलोकित हो रहे हैं। अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद कोल्हापुर के कार्याध्यक्ष अभिषेक अशोक पाटील कोल्हापुर ने कहा कि आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के शिष्य मुनिश्री सर्वार्थ सागर जी ने यहां प्रवचन में कहा कि -ज़िंदगी में सफलता पाने का सबसे बड़ा मंत्र है-कोशिश लेकिन, सिर्फ कोशिश नहीं, कोशिश दमदार होनी चाहिए। जब हम दिल और जुनून से कोशिश करते हैं तो वक्त भी हमारा साथ देता है और किस्मत भी बदलने लगती है।

हम अक्सर कहते हैं, ‘मेरा वक्त नहीं है’ या ‘मेरी किस्मत खराब है’ लेकिन, याद रखें वक्त और किस्मत स्थिर नहीं रहते। वे बदलते रहते हैं। जिस व्यक्ति की कोशिशों में जुनून और निरंतरता होती है। वह वक्त को अपने पक्ष में कर लेता है। हमारा काम है कोशिश करते रहना, संघर्ष करते रहना, हार न मानना। जैसे नदी पत्थर से टकराकर रास्ता बनाती है।

वैसे ही हमारी कोशिशें भी मुश्किलों को पार कर हमें मंज़िल तक पहुंचाती हैं। इसलिए जब भी मुश्किलें आएं, हिम्मत न हारें। अपनी कोशिशों को और मजबूत करें क्योंकि, वक्त और किस्मत दोनों हमारे प्रयासों के सामने झुक जाते हैं। याद रखें-कोशिश दमदार हो, तो वक्त भी बदलता है और किस्मत भी।

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Shreephal Jain News

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