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श्रावक-श्राविकाओं को प्रतिदिन छह आवश्यक कर्म करना जरूरी : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने श्रावक के षट् आवश्यक कर्त्तव्य का किया विवेचन 

गणिनी आर्यिका श्री सुपार्श्वमति जी की समाधि स्थली श्री चंद्रप्रभ जिनालय में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी 36 साधु सहित ग्रीष्म कालीन वाचना कर रहे हैं। उन्होंने...

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अपने नगरों में क्यों आवश्यक हैं धार्मिक शिक्षण शिविर : जिस समाज में संस्कार जीवित रहते हैं, ‎वहीं धर्म जीवित रहता है ‎और जहाँ धर्म जीवित रहता है 

जैन धर्म, ‎एक ऐसा धर्म, जो अपनी प्राचीनता, महानता और अद्वितीय सिद्धांतों के कारण सम्पूर्ण विश्व में सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। ‎जिसके प्रत्येक आचार्य...

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धर्म भय का नाम नहीं, बल्कि जीवन की दिशा है : ‎ ‎धर्म तो वह पवित्र चेतना है, जो मनुष्य को उसके भीतर के सत्य से परिचित कराती है

जहां भय समाप्त होता है, वहीं से धर्म की शुरुआत होती है। मनुष्य के जीवन में जैसे ही धर्म शब्द प्रवेश करता है, उसके मन में अनेक प्रश्न जन्म लेने लगते हैं। ‎यह...

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अंबाह में श्री कल्याण मंदिर विधान में उमड़ी श्रद्धा: मुनिश्री अनुकरण सागर जी के प्रवचनों से गूंजा अंबाह, आत्मशुद्धि और संयम का दिया संदेश

जीवन में सर्व बाधाओं से मुक्ति, मानसिक शांति एवं आत्मकल्याण की मंगल भावना के साथ आयोजित श्री कल्याण मंदिर विधान अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण में...

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आचार्यश्री विशुद्ध सागर जी का संघ सहित मंगल प्रवेश: 60 दिगंबर साधु एक साथ एक ही मंच पर विराजमान हुए 

सलेहा की पावन धरती आज ऐतिहासिक क्षण की साक्षी बनी। जब आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज संघ सहित भव्य मंगल प्रवेश करते हुए नगर में पधारे। उनके साथ 60 दिगंबर...

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40 श्रावकों ने गोचरी दया में भाग लिया जिनशासन की सेवा की : गोचरी दया के अवसर पर लघु नाटिका का किया मंचन

एक दिन का साधु जीवन पुण्यदायक तप के समान है। एक का साधु जीवन व्यतीत कर गृहस्थ श्रावकों को तप साधना से रूबरू होने का अवसर प्रदान करती है गोचरी दया। यह विचार...

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कविता काष्ठरथ: प्रतीके सौहार्द्र: शांति-सद्भाव के लिए रथोत्सव पर भावपूर्ण कविता

पर्युषण पर्व के समापन पर प्रतिवर्ष निकाले जाने वाले रथोत्सव पर भावपूर्ण और अहिंसा, शांति, विश्व बंधुत्व, भातृत्व भाव, संयम, त्याग, तप, तपस्या आदि धर्म का पालन...

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स्व को जानने और जगाने का पर्वाधिराज है पर्युषण : तप, संयम और धर्म रक्षा के संकल्प को पूरा करते हैं श्रावक-श्राविकाएं 

जैन समाज के पर्वाधिराज पर्युषण को लेकर समाजजनों में धार्मिक उल्लास तो है ही, साथ ही इस उत्साह के साथ इसका इंतजार किया जा रहा है कि अब यह वह समय है जब हम स्व को...

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मेरे गुरु देव का गहन चिंतन मेरे लिए प्रेरणा: गुरु पूर्णिमा पर आचार्यश्री विद्यासागर जी के विचार प्रेरणादायक 

मेरे गुरुदेव नीचे देखते हुए वह पूरी धरती को देख लेते हैं। हमारे अंदर दृष्टि से ही ममत्व भाव शांति का संचार कर देते हैं। जिनके तपों बल से तपस्या से हम शुरू से...

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आभास हैं तो पिता आकाश भी है: पितृ दिवस पर अपने पिताश्री को समर्पित काव्यांजलि 

जैन धर्म और धर्मशास्त्रों के अनुसार संयम, त्याग, समर्पण और सेवा के लिए हमारे साधु-संतों की दिव्य वाणी में संदेश होता है। अब आप देखिए पिता क्या हैं? उनको...

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