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25 वर्षों से जैन संतों की सेवा में समर्पित जिनेंद्र जैन : मुनिराजों के मंगल विहार में अग्रणी रहने वाला व्यक्तित्व 

आगर नगर के धर्मप्रेमी, सेवाभावी जितेंद्र जैन 25 वर्षों से जैन संतों की सेवा श्रद्धा समर्पण के साथ करते आ रहे हैं। जब भी नगर के आसपास किसी भी जैन साधु संत का...

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विन्रम एकेडमी पाठशाला में बच्चों की उत्साहपूर्ण भागीदारी : आत्मिक शुद्धि और नैतिक मूल्यों की शिक्षा ले रहे बच्चे

अंबाह परेड स्थित जैन मंदिर में विन्रम एकेडमी द्वारा आयोजित धार्मिक पाठशाला में बच्चों का उत्साह देखते ही बनता है। इस पाठशाला के माध्यम से बच्चों को जैन धर्म की...

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मुनि श्री सुधासागर जी महाराज ने कर्म कर कमाने के मार्ग बताए: मुनिश्री के प्रवचनों में श्रद्धालुओं को मिल रही धर्म की प्रेरणा

मुनिश्री सुधासागर जी के प्रवचन रोज चल रहे हैं और वे धर्मसभा में जैन समाज को कर्म, धर्म और संयम की परिभाषा से अवगत करवा रहे हैं। धर्म सभा में दी गई देशना से...

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आचार्य विनम्र सागर जी के प्रवचनों का सार संसार में असार है: आचार्यश्री के प्रवचन में बड़ी संख्या में समाजजन रहे मौजूद 

दिगंबर जैन आदिनाथ जिनालय छत्रपति नगर में गुरुवार को ‘जीवन है पानी की बूंद कब मिट जाऐ रे’ के रचयिता उच्चारणाचार्य विनम्र सागर जी महाराज ने धर्मसभा में प्रवचन...

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आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का केश लोच : केशलोच दिगंबर साधु का मूल गुण

आचार्य श्रीवर्धमान सागर जी, मुनि श्री प्रभव सागर जी, मुनि श्री प्रबुद्ध सागर, आर्यिका श्री निर्माेहमति एवं क्षुल्लक श्री विशाल सागर ने केश लोच किए। केश लोचन के...

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कुण्डलपुर में आचार्यश्री समय सागरजी का आचार्य पदारोहण दिवस मनाया गयाः आचार्य छत्तीसी विधान, भजन संध्या का हुआ आयोजन

सिद्धक्षेत्र कुण्डलपुर में प.पू.आचार्य श्री विद्या सागरजी महाराज के शिष्य आचार्यश्री समय सागरजी महाराज का आचार्य पदारोहण दिवस धूमधाम से मनाया गया। एक वर्ष...

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जन्म, मरण संयम, तप, साधना पूर्वक समाधि मरण से सार्थक होता हैं-आचार्यश्री वर्धमान सागरजीः त्याग की प्रेरणा लेना चाहिए

आचार्यश्री वर्धमान सागरजी महाराज अनेक जिनालयों मुनियों की जन्मस्थली धर्म नगरी धरियावद में 52 साधु सहित विराजित हैं। प्रतिदिन दोपहर को आचार्यश्री सानिध्य में...

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संयम दीक्षा धारण करने से सच्चा सुख मिलता है-मुनि हितेंद्र सागरजीः आचार्य वर्धमान सागरजी धर्म प्रभावना कर रहे हैं।

साधुओं की जन्म एवं कर्म भूमि धर्मनगरी मुंगाणा में आचार्य वर्धमान सागरजी ससंघ विराजित है। श्रावक-श्राविकाओं के संस्कार शिविर का आयोजन चल रहा है। जिसमें हितेंद्र...

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स्त्रियों में हमेशा प्रमाद विद्यमान रहता है-आचार्यश्री वर्धमान सागरजीः श्री महायशमति ने श्रावक का अर्थ प्रतिपादित किया

प्रमादमय स्त्रियों को प्रमादमय मूर्तियों की उपमा दी गई है, अर्थात स्त्रियों में हमेशा प्रमाद विद्यमान रहता है, जिस प्रकार मिट्टी की मूर्ति में मिट्टी की बहुलता...

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मोक्ष महल का द्वार है दीक्षा -अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

प्रकृति के अनुसार रहना ही मुनि दीक्षा धर्म प्रभावना और आत्म कल्याण से मोक्ष का द्वार है दीक्षा जैन धर्म में संन्यास को दीक्षा कहा है। पुरुष की दीक्षा में तीन...

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