Tag - jain philosophy

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उत्तम शौच धर्म के साथ परयूषण का चौथा दिवस मनाया : भगवान पुष्पदंत का मोक्ष कल्याणक, मंदिरों में चढ़ाए निर्वाण लाडू

धामनोद (बड़वानी) – परयूषण पर्व के चौथे दिवस को उत्तम शौच धर्म के रूप में मनाया गया। इस दिन भगवान पुष्पदंत का मोक्ष कल्याणक बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।...

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दशलक्षण पर्व में आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज ने कपट और छल से बचने का मार्ग दिखाया : आर्जव धर्म और सरल स्वभाव के महत्व पर आचार्य श्री का मंगल प्रवचन

रामगंजमंडी में दशलक्षण पर्व के तीसरे दिन आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि कपट और छल का कोई भी कल्याण नहीं होता। सरल स्वभाव...

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उत्तम आर्जव धर्म पर प्रतिष्ठाचार्य विजय कुमार जैन का सारगर्भित प्रवचन : गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माताजी ससंघ अयोध्या में विराजमान

अयोध्या में विराजमान गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माताजी के ससंघ ब्रह्मचारी प्रतिष्ठाचार्य विजय कुमार जैन ने उत्तम आर्जव धर्म पर प्रवचन देते हुए कहा कि मन, वचन और काय...

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सनावद में धूमधाम से मनाया गया नगर गौरव आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज का 76वां वर्षवर्धन : भव्य अभिषेक, प्रवचन और 76 दीपों से आरती के साथ नगर में गूँजा भक्ति का स्वर

सनावद नगर में आज पर्युषण पर्व के तृतीय दिवस पर नगर गौरव आचार्य श्री 108 वर्धमान सागर जी महाराज का 76वां वर्षवर्धन दिवस धूमधाम और भक्ति भाव से मनाया गया। इस...

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सहारनपुर में दसलक्षण महापर्व पर उत्तम शौच धर्म की प्रभावना, संतोष में है जीवन का वास्तविक सुख : उत्तम आर्जव धर्म मानव दुःखी है पदार्थ से नहीं, लोभ से – आचार्य श्री विमर्शसागर

सहारनपुर में दशलक्षण महापर्व के अंतर्गत भावलिंगी संत दिगंबराचार्य श्री विमर्शसागर जी महाराज ने उत्तम शौच धर्म की महत्ता समझाते हुए कहा कि मनुष्य दुःखी पदार्थ...

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भिंड में पर्युषण पर्व पर मैना सुंदरी नाटक का आयोजन, श्रद्धालुओं ने लिया हिस्सा : मेडिटेशन गुरु बिहसंत सागर जी के सानिध्य में जैन धर्म की अनोखी प्रस्तुति

भिंड में पर्यूषण पर्व के अवसर पर मेडिटेशन गुरु बिहसंत सागर जी के सानिध्य में बद्रीप्रसाद की बगिया में मैना सुंदरी नाटक का आयोजन किया गया। इस नाटक में धर्म...

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अभिमान त्यागने से ही मिलता है आत्मिक सुख और शांति : अहंकार विष के समान, मार्दव धर्म अमृत स्वरूप है – पट्टाचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी

पट्टाचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि अहंकार विष के समान है, जो आत्मा को भीतर से खोखला कर देता है, जबकि मार्दव धर्म अमृत स्वरूप है...

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पर्वाधिराज पर्यूषण के दूसरे दिन मनाई गई उत्तम मार्दव धर्म की आराधना : मुनि साध्यसागर व मुनि विश्वसूर्यसागर महाराज ने दिए मंगल प्रवचन

सनावद में पर्वाधिराज पर्यूषण के दूसरे दिन उत्तम मार्दव धर्म की आराधना की गई। मुनि साध्यसागर जी महाराज व मुनि विश्वसूर्यसागर जी महाराज ने अहंकार त्याग और...

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जब मृदुता आती है तभी प्रकट होता है उत्तम मार्दव धर्म – दसलक्षण पर्व का दूसरा दिन : ऐसी पाठशाला होनी चाहिए जिसमें झुकना सिखाया जाए – आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज

रामगंजमंडी में दसलक्षण पर्व का दूसरा दिन उत्तम मार्दव धर्म की पूजा और आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज के मंगल प्रवचन के साथ मनाया गया। आचार्य श्री ने कहा कि...

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अहंकार जीव को पतन की ओर ले जाता है – बड़े जैन मंदिर में प्रवचन : विनम्रता से ही आत्मा का उद्धार संभव है – मुनिश्री विबोधसागर

मुरैना के बड़े जैन मंदिर में पर्यूषण पर्व के दूसरे दिन मुनिश्री विबोधसागर जी ने उत्तम मार्दव धर्म का महत्व समझाते हुए कहा कि अहंकार आत्मा के पतन का कारण है और...

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