Tag - jain philosophy

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झुमरीतिलैया में उत्तम त्याग धर्म का पर्व श्रद्धा और भक्ति से मनाया : डॉ. निर्मला दीदी ने कहा – त्याग से ही जीवन बनता है पूज्य

झुमरीतिलैया (कोडरमा) में दसलक्षण पर्यूषण के आठवें दिन “उत्तम त्याग धर्म” का आयोजन भक्ति और उल्लास के साथ हुआ। डॉ. निर्मला दीदी ने प्रवचन में त्याग को जीवन...

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दसलक्षण पर्व पर त्याग और दान का गूढ़ महत्व समझाया : मन के विकारों का शमन ही है उत्तम त्याग – मुनिश्री विलोक सागर

मुरैना में दसलक्षण पर्व के आठवें दिन बड़े जैन मंदिर में मुनिश्री विलोक सागर जी और मुनिश्री विबोध सागर जी ने कहा कि उत्तम त्याग का अर्थ केवल वस्तुओं का त्याग...

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दान, सदाचरण और संयम से जीवन में आती है शांति : त्याग इंसान को भगवान बना देता है – क्षुल्लक महोदय सागर

धरियावद में पर्वराज पर्यूषण के आठवें दिन क्षुल्लक श्री महोदय सागर जी महाराज ने धर्मसभा में त्याग धर्म की महिमा बताते हुए कहा कि त्याग से इंसान भगवान बन जाता...

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दशलक्षण महापर्व पर उत्तम त्याग धर्म की प्रेरणा : जब तक सांस है दान कर लो और अपने पुण्य को गाढ़ा कर लो – आर्यिका मां विकुंदन श्री जी

बड़वानी में दशलक्षण पर्व पर आर्यिका मां विकुंदन श्री जी ने त्याग और दान के महत्व पर प्रवचन दिया। उन्होंने बताया कि जीवन में त्याग और दान ही आत्मशुद्धि का मार्ग...

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सहारनपुर में दशलक्षण पर्व पर आचार्य श्री ने बताया त्याग का महत्व : संग्रहवृति दुःख का कारण है, “उत्तम त्याग धर्म” सुख का मार्ग – आचार्य विमर्शसागर

सहारनपुर में दशलक्षण पर्व के अंतर्गत आचार्य श्री विमर्शसागर जी ने कहा कि संग्रहवृति दुःख का कारण है और त्याग धर्म ही जीवन को सुखी बनाता है। निस्वार्थ दान और...

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दशलक्षण पर्व के सप्तम दिन उत्तम तप धर्म की महिमा पर प्रवचन : इच्छाओं को रोकना ही सच्चा तप है – आचार्य विनिश्चय सागर जी महाराज

रामगंजमंडी में दशलक्षण पर्व के सप्तम दिन परम पूज्य आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर जी महाराज ने उत्तम तप धर्म की महिमा पर प्रवचन दिया। उन्होंने कहा कि इच्छाओं को...

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प्रतिक्रमण से पापों का क्षय होता है, आत्मा आध्यात्मिक मार्ग पर बनी रहती है : प्रत्येक श्रावक को प्रतिदिन प्रतिक्रमण करना चाहिए – अनूप भंडारी

मुरैना में पूज्य गुरुदेव आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज के परम भक्त श्रावक श्रेष्ठी अनूप भंडारी ने प्रतिक्रमण के महत्व पर प्रकाश डाला। प्रतिक्रमण कर्मों के...

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दशलक्षण महापर्व का सातवाँ दिन – उत्तम तप का संदेश : आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महामुनिराज का प्रवचन

तरुणसागरम तीर्थ, कोडरमा में दशलक्षण महापर्व के सातवें दिन परम पूज्य आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागरजी महामुनिराज ने उपस्थित गुरु-भक्तों को उत्तम तप धर्म का संदेश...

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अनन्त चतुर्दशी पर हर घर से भेजी जाएगी पूजन की थाली : संत महापुरुष तपोबल से ही प्राप्त करते हैं सिद्धत्व – मुनिश्री विलोक सागर

मुरैना के बड़े जैन मंदिर में मुनिश्री विलोक सागरजी ने प्रवचन में कहा कि इच्छाओं पर नियंत्रण और आत्म संयम ही उत्तम तप धर्म है। पर्यूषण पर्व के अंतिम दिन अनंत...

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तीर्थंकर पद भी संयम धारण किए बिना संभव नहीं, मंगल देशना : आत्मा की उन्नति के लिए संयम रूपी ऊर्जा शक्ति जरूरी – आचार्य वर्धमान सागर

दसलक्षण पर्व के छठे दिन आचार्य वर्धमान सागर जी ने कहा कि आत्मा की उन्नति और तीर्थंकर पद की प्राप्ति के लिए संयम रूपी ऊर्जा शक्ति अत्यंत आवश्यक है। संयम जीवन का...

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