Tag - jain philosophy

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जहां अनेकांत है वहीं जैन धर्म है : वैज्ञानिक धर्माचार्य कनक नंदी गुरुदेव ने वेबिनार में किया जिज्ञासाओं का समाधान

सागवाड़ा से आयोजित अंतरराष्ट्रीय वेबिनार में वैज्ञानिक धर्माचार्य कनक नंदी गुरुदेव ने अनेकांतवाद, विनय, आत्मज्ञान और जैन दर्शन के गूढ़ सिद्धांतों पर विस्तार से...

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जहां अनेकांत है वहीं जैन धर्म है : वैज्ञानिक धर्माचार्य कनक नंदी गुरुदेव ने वेबिनार में किया जिज्ञासाओं का समाधान

सागवाड़ा से आयोजित अंतरराष्ट्रीय वेबिनार में वैज्ञानिक धर्माचार्य कनक नंदी गुरुदेव ने अनेकांतवाद, विनय, आत्मज्ञान और जैन दर्शन के गूढ़ सिद्धांतों पर विस्तार से...

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मृत्यु निश्चित, संबंध अस्थायी, कर्मों का फल अवश्य मिलता है : आचार्य विनिश्चय सागर ने दिया वैराग्य और आत्मकल्याण का संदेश

सुरुरपुर में आयोजित श्री मज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक महोत्सव के दौरान आचार्य श्री विनिश्चय सागर जी महाराज ने मृत्यु-स्मरण, कर्म सिद्धांत, वैराग्य और आत्मकल्याण पर...

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अहिंसा कटघरे में है, या हमारी समझ? : संवाद, संवेदना और सत्य की आवश्यकता

मोरपंख विवाद के संदर्भ में जैन समाज की अहिंसक परंपरा, पिच्छिका के महत्व और धार्मिक भावनाओं पर उठे प्रश्नों को लेकर यह विचार लेख संवाद, प्रमाण और संवेदनशीलता की...

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मेनका गांधी को आधारभूत जैन सिद्धांत समझने की आवश्यकता : जैन परंपरा पर टिप्पणी से पहले अध्ययन और संवाद जरूरी

द्रोणगिरि-सागर के विद्वान सुनील सुधाकर शास्त्री ने कहा कि जैन धर्म की अहिंसा परंपरा को समझे बिना की गई टिप्पणियां समाज की भावनाओं को आहत करती हैं। उन्होंने...

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योग : जीवन का संतुलन, आत्मा से आत्मा का संवाद : अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर भारतीय ज्ञान और अध्यात्म की वैश्विक गूंज

योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के समन्वय की जीवन-पद्धति है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस भारत की उस महान आध्यात्मिक विरासत का उत्सव है...

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भारतीय ज्ञान परंपरा के उत्कर्ष में जैन दर्शन, साहित्य और संस्कृति की अमिट भूमिका : अहिंसा, अनेकांत और ज्ञान की धारा ने समृद्ध किया भारतीय चिंतन

भारतीय ज्ञान परंपरा के विकास में जैन दर्शन, साहित्य और संस्कृति का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। प्राकृत भाषा, आगम साहित्य और जैनाचार्यों के वाङ्मय ने...

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वस्तुत्व महाकाव्य में जैन दर्शन पर ममता खासगीवाला को डॉक्टरेट उपाधि : पारसी कॉलेज मुंबई में 30 मई को हुआ दीक्षांत समारोह

वस्तुत्व महाकाव्य में जैन दर्शन पर नगर के कंचनबाग में निवासरत ममता खासगीवाला की अथक मेहनत रंग लाई और उन्हें इस शोध ग्रंथ पर डॉक्टरेट की मानद उपाधि से 30 मई को...

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गिरती वैश्विक अर्थव्यवस्था एवं जैनत्व की अवधारणा: संयम, संतुलन और सहअस्तित्व की ओर लौटने का आह्वान 

आज का विश्व एक विचित्र विरोधाभास के मध्य खड़ा है। विज्ञान अपनी चरम सीमा पर है, तकनीक आकाश को छू रही है, उत्पादन की मशीनें निरंतर गति से चल रही हैं, फिर भी...

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चर्चा नहीं, आचरण बोलता है : मुनि पूज्यसागर महाराज : राष्ट्रीय संगोष्ठी के अंतिम सत्र में सिरि भूवलय को सत्यता की कसौटी पर परखा गया

कुंदकुंद ज्ञानपीठ, इंदौर में आयोजित द्विदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के अंतिम सत्र में मुनि श्री पूज्यसागर महाराज ने आचरण और व्यवहार की महत्ता पर प्रकाश डाला।...

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