मुनि श्री निरंजन सागर ने प्रवचन के दौरान कहा कि प्रसिद्धि भी दो तरह से होती है। पहली विख्यात और दूसरी कुख्यात ।यह ख्याति की चाह, पूजन( आदर सत्कार) की चाह, लाभ...
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अशुद्ध कारण से कभी त्रिकाल में भी शुद्ध कार्य घटित नहीं हो सकता है। बिना कारण के भी कोई कार्य संपन्न नहीं होता और कारण के होते पर भी कार्य हो जाए, यह भी आवश्यक...
प्रतापगढ़। आप अपना मन स्थिर रखें। जैसे आप अपने समस्त सांसारिक कार्यों की योजना बनाते हैं, उसी तरह से जीव के कल्याण की योजना बनाएं। तभी आप मोक्ष मार्ग पर आगे...








