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साइंस ऑफ लिविंग सत्र में प्रवचन : आदत होना सही, गलत आदत होना दुर्गति का कारण – मुनि श्री निरंजन सागर जी

साइंस ऑफ लिविंग सत्र में मुनि श्री निरंजन सागर जी महाराज जीवन जीने का सबका अपना-अपना तरीका है। व्यक्ति का स्वयं के मापदंडों से जीना ठीक है लेकिन मापदंड के बारे...

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साइंस ऑफ लिविंग सत्र जारी : जो खुद को समझ पाते हैं वे ही खुदा बन पाते हैं- मुनि श्री निरंजनसागर जी महाराज

कुंडलपुर में मुनि श्री निरंजन सागर महाराज ने प्रवचन के दौरान कहा कि हम स्व की ओर ध्यान न देकर पर की ओर ध्यान देते हैं, तो यह हमारी अज्ञानता है। पढ़िए जयकुमार...

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साइंस ऑफ लिविंग पर प्रवचन दे रहे हैं : संघर्ष भी सहर्ष स्वीकार करना चाहिए – मुनि श्री निरंजन सागर जी

मुनि श्री निरंजन सागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि जिस भी व्यक्ति ने संघर्षों को सहर्ष के साथ स्वीकार किया है, उस संघर्ष के काल में जिसने धैर्य को नहीं खोया...

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धर्म प्रभावना: दया धर्म का पालन करना सिखाता है जैन धर्म : आचार्य श्री विमर्श सागर

बकस्वाहा के पारसनाथ जैन मंदिर परिसर में आयोजित धर्मसभा में ‘ जीवन है पानी की बूंद ‘ महाकाव्य के मूल रचयिता, बुंदेलखण्ड गौरव, भावलिंगी संत...

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तप कल्याणक : जिससे आत्मा पवित्र होती है उसका नाम पुण्य है : आचार्य विशुद्ध सागर जी

ग्राम गिरार में श्री मज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में चौथे दिन प्रतिष्ठाचार्य जयकुमार निशांत भैया व पं सनत कुमार, विनोद कुमार के द्वारा विधि-विधान...

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धर्म प्रभावना : आदर्श जीवन से ही बनता है गौरवशाली इतिहास : मुनि श्री निरंजन सागर 

मुनि श्री निरंजन सागर ने प्रवचन के दौरान कहा कि प्रसिद्धि भी दो तरह से होती है। पहली विख्यात और दूसरी कुख्यात ।यह ख्याति की चाह, पूजन( आदर सत्कार) की चाह, लाभ...

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प्रवचन : जैसा होता है बांस, वैसी ही बनती है बांसुरी : मुनि श्री निरंजनसागर

अशुद्ध कारण से कभी त्रिकाल में भी शुद्ध कार्य घटित नहीं हो सकता है। बिना कारण के भी कोई कार्य संपन्न नहीं होता और कारण के होते पर भी कार्य हो जाए, यह भी आवश्यक...

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मन को स्थिर रखने से बढ़ोगे आगे – आचार्य श्री सुंदर सागर महाराज

प्रतापगढ़। आप अपना मन स्थिर रखें। जैसे आप अपने समस्त सांसारिक कार्यों की योजना बनाते हैं, उसी तरह से जीव के कल्याण की योजना बनाएं। तभी आप मोक्ष मार्ग पर आगे...

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