वागोल स्थित दिगंबर जैन मंदिर में बुधवार को आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज के ससंघ सान्निध्य में 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ की 23फीट ऊंची खड्गासन प्रतिमा का पंचामृत महामस्तकाभिषेक किया गया। पढ़िए कुशलगढ़ से अजीत कोठिया डडूका की रिपोर्ट…
कुशलगढ़। वागोल स्थित दिगंबर जैन मंदिर में बुधवार को आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज के ससंघ सान्निध्य में 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ की 23फीट ऊंची खड्गासन प्रतिमा का पंचामृत महामस्तकाभिषेक किया गया। दिगंबर जैन बीस पंथी समाज अध्यक्ष जयंतीलाल सेठ ने बताया कि वागोल पार्श्वनाथ भगवान की शांतिधारा आशीष सुरेंद्र पिंडारमा परिवार कुशलगढ़ ने की। खड्गासन प्रतिमा की प्रथम कलश से शांतिधारा विजयलाल कोठारी समर्पण, अर्पण परिवार कुशलगढ़ परिवार ने की।
जीवन का वास्तविक उद्देश्य आत्म कल्याण
धर्मसभा में आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने त्याग, तपस्या व आत्मशुद्धि के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य आत्म कल्याण है। भोगों की अंधी दौड़ से हटकर त्याग और तपस्या का मार्ग अपनाने से ही आत्मा का उत्थान संभव है। शाम को आचार्य ससंघ का दाहोद की ओर विहार हुआ। समाज अध्यक्ष जयंतीलाल सेठ ने बताया कि 17 जून को दाहोद में आचार्य प्रसन्न सागरजी महाराज एवं आचार्य सुनील कुमार जी महाराज ससंघ का महामिलन होगा।













Add Comment