Tag - पद विहार

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आर्यिकाओं को महिला समाज ने दी विनयांजलि : रीवा में पद विहार कर रहीं दो आर्यिकाओं की सड़क हादसे में हुआ था समाधिमरण 

रीवा में पद विहार के दौरान सड़क दुर्घटना में दो आर्यिकाओं के दुखद समाधिमरण पर जैन समाज में गहरा शोक व्याप्त है। इस दुःखद घटना पर नगर के श्री अजितनाथ बड़ा मंदिर...

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युवा ही देश की शक्ति युवा ही पहचान : पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागरजी ने किया मंगल प्रवेश

पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज ससंघ 30 मुनि राजो के साथ उमरी से पद विहार करते हुए नगर में प्रवेश किया तो भक्तों का जन सैलाब उमड़कर दर्शन के लिए सड़कों...

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साधु संतों के पदविहार में आवश्यक सावधानी श्रावकों के कर्तव्य : पद विहार होती है आत्मजागरण, धर्मप्रभावना और लोकमंगल की पवित्र यात्रा

भारतीय संस्कृति की आत्मा यदि किसी में स्पंदित होती दिखाई देती है, तो वह तपस्वी संतों के चरणों में ही दिखाई देती है। त्याग, संयम, अहिंसा और आत्मशुद्धि की दिव्य...

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तपती धूप में नंगे पैर निकले मुनि अनुकरण सागर जी: अंबाह से पोरसा तक पद विहार बना श्रद्धा का महासंगम

भीषण गर्मी और तेज धूप के बीच बुधवार को संयम, तप और आत्मबल का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। लगभग 43 डिग्री तापमान में बालमुनिश्री अनुकरण सागर जी महाराज ने अंबाह...

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उपाध्याय श्री विहसंत सागर जी का धौलपुर की ओर विहार : धौलपुर में होगा भव्य मंगल प्रवेश

उपाध्याय श्री विहसंतसागरजी महाराज ससंघ का ज्ञानतीर्थ मुरैना से धौलपुर की ओर मंगल विहार हुआ है। मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर… मुरैना। उपाध्याय...

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गुरुओं का सान्निध्य पुण्यशाली जीवों को ही मिलता है : मुनिश्री विलोकसागरजी का धौलपुर में भव्य मंगल प्रवेश हुआ गूंजे जयकारे

जब तक श्रावक हैं, तभी तक श्रमण परंपरा कायम हैं। जब श्रावक ही नहीं होगें, तो श्रमण परंपरा स्वतः समाप्त हो जाएगी। दिगंबर साधुओं की परंपरा को जारी रखने में...

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युगल मुनिराजों का पिच्छिका परिवर्तन समारोह सम्पन्न : मुनिश्री विलोकसागर महाराज निर्यापक श्रमण उपाधि से विभूषित

मुरैना में वर्षायोग समापन अवसर पर आयोजित पिच्छिका परिवर्तन समारोह में मुनिश्री विलोकसागरजी को निर्यापक श्रमण पद प्रदान किया गया, जहां श्रद्धालुओं ने...

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मुनिराज संघ का मंगल प्रवेश 2 जुलाई को नांद्रे में: इंदौर से विहार कर दहीगांव तक पहुंचे मुनिराज 

नांद्रे के इतिहास में चातुर्मास के लिए पहली बार पट्टाचार्य विशुद्धसागर जी महाराज के शिष्य मुनिश्री सारस्वत सागर जी, जयंत सागर जी, सिद्ध सागर जी और श्रुतसागर...

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स्वस्तिश्री जिनसेन भट्टारक स्वामीजी का पद विहार: नांदणी मिठ का इतिहास 1300 वर्ष पुराना

स्वस्तिश्री जिनसेन भट्टारक स्वामीजी का नांदणी से कुंथलगिरी और कुंथलगिरी से नांदणी तक पद विहार शुरु है। नांदणी के स्वस्तिश्री जिनसेन भट्टारक स्वामीजी नांदणी से...

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आगरा में हुआ दो दिगंबर संतों का वात्सल्य मिलन: भगवान शांतिनाथ की वृहद शांतिधारा की 

मुनिश्री अमितसागर जी के शिष्य पाठशाला प्रणेता मुनिश्री अनुमान सागर जी महाराज ने 15 जून की सुबह 5 बजे पश्चिमपुरी से पद विहार कर जयपुर हाउस चौराहा होते हुए...

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