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स्वस्तिश्री जिनसेन भट्टारक स्वामीजी का पद विहार: नांदणी मिठ का इतिहास 1300 वर्ष पुराना


स्वस्तिश्री जिनसेन भट्टारक स्वामीजी का नांदणी से कुंथलगिरी और कुंथलगिरी से नांदणी तक पद विहार शुरु है। नांदणी के स्वस्तिश्री जिनसेन भट्टारक स्वामीजी नांदणी से पद विहार करते हुए जयसिंगपुर, चिपरी पंचकल्याणक, कुंभोज, दूधगांव पंचकल्याणक, समडोली, डिग्रज, नांद्रे, कळंबी पंचकल्याणक कर के कुंथलगिरी पहुंचे। वहां उन्होने विधान और शिविर का आयोजन किया। नांदणी से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की यह खबर…


नांदणी। स्वस्तिश्री जिनसेन भट्टारक स्वामीजी का नांदणी से कुंथलगिरी और कुंथलगिरी से नांदणी तक पद विहार शुरु है। नांदणी के स्वस्तिश्री जिनसेन भट्टारक स्वामीजी नांदणी से पद विहार करते हुए जयसिंगपुर, चिपरी पंचकल्याणक, कुंभोज, दूधगांव पंचकल्याणक, समडोली, डिग्रज, नांद्रे, कळंबी पांचकल्याणक कर के कुंथलगिरी पहुंचे। वहां उन्होने विधान और शिविर का आयोजन किया। अब कुंथलगिरी से नांदणी की ओर विहार शुरु हैं। स्वस्तिश्री जिनसेन भट्टारक स्वामीजी तासगांव (महाराष्ट्र) में विराजमान हैं। जैन धर्म के विकास और संरक्षण के लिए भारत वर्ष में भट्टारक पीठों की निर्मिती हुई है। इन सभी भट्टारक पीठों में स्वस्तिश्री जिनसेन भट्टारक मठ संस्थान नांदणी, करवीर (कोल्हापुर) यह आद्य पीठ है। प्राचीन भारत के दिल्ली, पिंनगोंडी, जिनकंची और करवीर (नांदणी) ऐसी जिनसेन मठ की परंपरा चलती आ रही है। करवीर मठ संस्थान के कोल्हापुर, नांदणी, तेरदाळ और बेलगांव यह चार शाखापीठ है। इसलिए जिनसेन मठ का वास्तु अतिभव्य है।

मासिक पत्रिका से जैन तत्त्व ज्ञान का प्रचार-प्रसार का कार्य

नांदणी स्थित मठ का इतिहास 1300 वर्ष पुराना है। नांदणी मठ के आधिपत्य में दक्षिण महाराष्ट्र और उत्तर कर्नाटक के 743 गांव समाविष्ट है। इन सभी गांव में जैन धर्म के सभी धार्मिक महोत्सव, विधि विधान, पंचकल्याणक, धर्म का प्रसार एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम स्वस्तिश्री जिनसेन भट्टारक के आदेश से और आशीर्वाद से सानंद होते हैं। इस मठ की ओर से नूतन जिनालयों की निर्मिती, प्राचीन और पुराने जिनालयों का जीर्णाेद्धार, धार्मिक साहित्य लेखन का कार्य, धर्मप्रसार एवं समस्याओं का समाधान स्वस्तिश्री जिनसेन स्वामीजी के मार्गदर्शन से किया जाता है। नांदणी के मठ की ओर से ‘सर्वधर्म’ मासिक पत्रिका के माध्यम से जैन तत्त्व ज्ञान का प्रचार-प्रसार कार्य होता है। हर साल भगवान आदिनाथ निर्वाण के दिन महाशिवरात्रि को यहां पर महामस्तकाभिषेक होता है।

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