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संस्कारों के बीजारोपण लौकिक शिक्षा के प्रवेश 30 जून तक : श्री नवागढ़ गुरुकुलम् का शुभारंभ


छात्रों को संस्कारों के साथ विशेष शिक्षा के लिए 30 जून फिर तक प्रवेश दिला सकते हैं। नवागढ़ समिति एवं नवागढ़ गुरुकुलम परिवार आपके सहयोग से ही इसे विद्यादान को नि:शुल्क संचालित करने का पुरुषार्थ कर रहे हैं। नवागढ़ से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर…


नवागढ़। अतिशय क्षेत्र नवागढ़ के गुरुकुल में नवीन सत्र के लिए प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है। गुरुकुल में बच्चों को जैन दर्शन, धार्मिक, लौकिक शिक्षा दी जाती है। शिक्षा के साथ ही बच्चों में संस्कारों का बीजारोपण किया जाता है। प्रागैतिहासिक अतिशय क्षेत्र नवागढ़ में भगवान अरनाथ स्वामी का अतिशय आज भी भक्तों के अशुभ असाता से उन्हें छुटकारा दिला रहा है। प्राचीनता एवं संस्कृति संरक्षण यहां की प्राचीनता में गुरुकुल परंपरा के कई साक्ष्य मिले हैं। जिनसे प्रेरित होकर ब्रह्मचारी जयकुमार निशांत एवं पुष्प परिवार ने नवागढ़ अन्वेषक पंडित गुलाब चंद्र पुष्प की स्मृति में श्री नवागढ़ गुरुकुलम का शुभारंभ किया है। इस गुरुकुल में कक्षा 6, 7 एवं 8 के प्रतिभाशाली छात्रों को जैनत्व के संस्कारों के साथ अंग्रेजी माध्यम से वरिष्ठ अनुभवी शिक्षकों द्वारा शिक्षा प्रदान की जाती है।

परिवेश एवं व्यवस्था ऐसी है

प्राकृतिक सौंदर्य एवं खुले परिवेश में छात्र प्रतिदिन पूजन, आरती, स्वाध्याय के साथ शुद्ध पौष्टिक भोजन प्राप्त करते हैं। यहां आधुनिक शिक्षा कंप्यूटर के माध्यम से गणित, अंग्रेजी, संस्कृत, हिंदी, सोशल साइंस आदि के साथ ज्योतिष, वास्तु एवं व्यवहारिक ज्ञान का शिक्षण प्रशिक्षण दिया जाता है।

उच्च शिक्षा के लिए मिलता सहयोग

नवागढ़ से प्रतिभाशाली छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए मुनि श्री प्रणम्य सागर महाराज के आशीर्वाद से संचालित रेवाड़ी अकलंक शरणालय, गुरुकुल खुरई एवं मड़िया में विशेष शिक्षा नवागढ़ गुरुकुलम के सहयोग से प्रदान की जा रही है।

विशेष आमंत्रण यह है

आप भी अपने प्रतिभाशाली छात्रों को संस्कारों के साथ विशेष शिक्षा के लिए 30 जून फिर तक प्रवेश दिला सकते हैं। नवागढ़ समिति एवं नवागढ़ गुरुकुलम परिवार आपके सहयोग से ही इसे विद्यादान को नि:शुल्क संचालित करने का पुरुषार्थ कर रहे हैं। आप सभी का सहयोग अपेक्षित है। नवागढ़ गुरुकुलम के संस्थापक ब्रह्मचारी जयकुमार निशांत भैया ने विशेष रूप से छात्रों के ज्ञानवर्धन एवं धार्मिक शिक्षा के लिए विशिष्ट उपक्रम किया है। आप सभी इसका लाभ उठाकर अपने बच्चों को श्रवण संस्कृति के संरक्षण के लिए प्रवेश दिलाए।

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