समाचार

धर्म के संस्कार और बीज दादा दादी ही करते हैं रोपित : मुनि श्री प्रणुत सागर जी ने संस्कारों के लिए परिवार के बुजुर्गों को बताया आधार 


बड़वानी नगर में विराजित आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के शिष्य मुनि श्री प्रणुत सागर जी महाराज ने मंगलवार को बड़वानी दिगंबर जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आज हम गुरुवर आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज की कृपा और आशीर्वाद से बैठे है। आज कोई भी पाप का फल नहीं चाहता पर पाप से बचता कोई नहीं है। धामनोद से पढ़िए, दीपक प्रधान की यह खबर…


धामनोद। बड़वानी नगर में विराजित आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के शिष्य मुनि श्री प्रणुत सागर जी महाराज ने मंगलवार को बड़वानी दिगंबर जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आज हम गुरुवर आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज की कृपा और आशीर्वाद से बैठे है। आज कोई भी पाप का फल नहीं चाहता पर पाप से बचता कोई नहीं है। आज हमें जो भी प्राप्त हो रहा है, वो पुण्य से और धर्म से प्राप्त हो रहा है। यदि इस जन्म में कोई महिला गर्भ धारण नहीं कर पा रही है तो उसने पिछले जन्म में निश्चित ही कोई जीव का घात किया होगा या किसी मां से किसी बेटे का बिछोह करवाया होगा। कर्म हमेशा अपना काम बताता है और कर्म उदय में आता ही है। इसी वजह से वो गर्भ धारण नहीं कर पा रही है और यदि कोई जन्म से अंधा है तो निश्चित ही पिछले जन्म किसी को जानते या अनजाने में किसी जीव की आंखों की रोशनी छीन ली होगी। चाहे वो बाथरूम में एसिड से या साबुन सोडे से किसी छोटे निरीह जीव की आंखों की रोशनी छीनी होगी तो उसके परिणाम स्वरूप ये दशा हुई।

हमारी मां का उपकार है 

मुनिश्री ने कहा कि ये हम सब पर हमारी मां का उपकार है और हमारा पुण्य की विशुद्धि है कि हमको मनुष्य पर्याय मिली और साथ ही जैन कुल मिला। आप भाग्यशाली हो कि आपको जैन कुल में जन्म मिला। जिससे आपको भगवान को छूने, अभिषेक करने को मिल रहा है साधु संतों की वैया वृत्ति करने को मिल रही है। आहार, औषध दान करने को मिल रहा है और आपको ये संस्कार मिले हैं अपने दादा दादी से। जिस घर में दादा दादी हैं उस घर में बच्चे धर्मात्मा निकलेंगे। धर्म के बीजों का रोपण दादा दादी ही करते हैं। धार्मिक संस्कारों को रोपित और पोषित दादा दादी ही करते हैं। वे ही हाथ पकड़ कर देव दर्शन के लिए मंदिर ले कर आते है। मुनि की संगति प्राप्त होने से हमारे जन्म जन्म के पाप कटते हैं और मुनि की संगति से ही आप के अगले भव सुधरते हैं।

भगवान के अभिषेक और शांतिधारा में उमड़े श्रद्धालु 

भगवान नेमीनाथ के दादा के जीव का दृष्टांत देते हुए बताया कि वो जीव कई बार पहले से सातवें नर्क को भोग और मनुष्य भव में मुनि की संगति की तो उनके भी भाव सुधर गए और भव भी सुधर गया और उनके घर में भगवान नेमीनाथ जैसे तीर्थंकर बालक का जन्म हुआ। मुनि श्री ने कहा कि आप दान दो या मत दो पर दान के द्रव्य का दुरुपयोग मत करो, आप आहार दो या मत दो पर आहार में अन्तराय मत दो। धर्मसभा के पूर्व भगवान के अभिषेक और शांतिधारा हुई। धर्मसभा का संचालन और मंगलाचरण इंदौर नगर पुरोहित पंडित नितिन झांझरी ने किया। यह जानकारी मनीष जैन ने दी।

आप को यह कंटेंट कैसा लगा अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।
+1
2
+1
0
+1
0
Shree Phal News

About the author

Shree Phal News

Add Comment

Click here to post a comment

You cannot copy content of this page