अखिल भारतीय जैन युवा फेडरेशन, विश्वासनगर दिल्ली द्वारा आयोजित बाल संस्कार शिविर का समापन बुधवार को हुआ। इस शिविर में 400 से अधिक शिविरार्थियों की सहभागिता रही। शिविर में संपूर्ण विश्वासनगर जैन संस्कारों और बाल ऊर्जा से भरापूरा रहा। समापन समारोह में अनेक गणमान्य अतिथियों, विद्वानों एवं समाजजनों की गरिमामयी उपस्थिति रही। बांसवाड़ा से पढ़िए, सुरेशचंद्र गांधी की यह रिपोर्ट…
बांसवाड़ा। अखिल भारतीय जैन युवा फेडरेशन, विश्वासनगर दिल्ली द्वारा आयोजित बाल संस्कार शिविर का समापन बुधवार को हुआ। इस शिविर में 400 से अधिक शिविरार्थियों की सहभागिता रही। शिविर में संपूर्ण विश्वासनगर जैन संस्कारों और बाल ऊर्जा से भरापूरा रहा। समापन समारोह में अनेक गणमान्य अतिथियों, विद्वानों एवं समाजजनों की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम का मंगलाचरण नन्हें-मुन्ने बच्चों के मनोहारी नृत्य से हुआ। जिसने सभी का मन मोह लिया। शिविरार्थियों ने स्वार्थ का संसार नामक प्रेरणादायक नाटक का प्रभावशाली मंचन कर उपस्थित जनसमूह को महत्वपूर्ण संदेश दिया। बाहर से पधारे विद्वान पं. अश्विन शास्त्री नानावटी ने प्रेरक उद्बोधन में वर्तमान समय में संस्कार शिविरों की आवश्यकता एवं महत्ता पर प्रकाश डाला तथा बताया कि ऐसे शिविर बच्चों के सर्वांगीण विकास और संस्कार निर्माण के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
बच्चों के अनुशासन की सराहना
कार्यक्रम में आमंत्रित सभी विद्वानों पंडित अमन खनियांधाना, वंशित कोटा, संयम खेड़ागढ़, मयंक, विवेक, तंदुल, निश्चल एवं विदुषियों में आत्मार्थी स्वाति, आत्मार्थी नमन, इशिका, अंशिका ने शिविरार्थियों को पुरस्कार एवं सम्मान प्रदान किए। शिविर में बच्चों द्वारा प्रदर्शित प्रतिभा, अनुशासन एवं संस्कारों की सभी ने मुक्त कंठ से सराहना की।
शिविर प्रेरणादायक पहल हुआ सिद्ध
शिविर का संयोजन पं. श्रेयांश शास्त्री ने किया। समापन समारोह में 600 साधर्मी बंधुओं की उपस्थिति रही, जिन्होंने बच्चों का उत्साहवर्धन कर कार्यक्रम को भव्यता प्रदान की। यह शिविर बालकों में धार्मिक, सांस्कृतिक एवं नैतिक संस्कारों के संवर्धन की दिशा में एक सफल एवं प्रेरणादायक पहल सिद्ध हुआ। ट्रस्ट के प्रधान अरविंद, कोषांध्यक्ष रुचिर, निर्देशक विवेक शास्त्री की उपस्थिति मे महामंत्री नीरज ने सबका आभार व्यक्त किया।













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