पुष्पगिरी तीर्थ प्रणेता गणाचार्य 108 श्री पुष्पदंत सागर महाराज के प्रियाग्र शिष्य, अहिंसा तीर्थ प्रणेता, असम राज्य के राजकीय अतिथि, आचार्य 108 श्री प्रमुख सागर महाराज ससंघ (13 पिच्छी) का रविवार 11 जून को गुवाहाटी की पुण्य धरा पर चातुर्मास के लिए मंगल प्रवेश होगा। पढ़िए एक रिपोर्ट…
गुवाहाटी। पुष्पगिरी तीर्थ प्रणेता गणाचार्य 108 श्री पुष्पदंत सागर महाराज के प्रियाग्र शिष्य, अहिंसा तीर्थ प्रणेता, असम राज्य के राजकीय अतिथि, आचार्य 108 श्री प्रमुख सागर महाराज ससंघ (13 पिच्छी) का रविवार 11 जून को गुवाहाटी की पुण्य धरा पर चातुर्मास के लिए मंगल प्रवेश होगा। इस ज्ञान की महागंगा की भव्य मंगल अगवानी का धर्म लाभ लेने तथा धर्म प्रभावना में वृद्धि के लिए पूर्वांचल के सकल दिगम्बर जैन समाज को आमंत्रित किया गया है।
चातुर्मास के लिए चार जून को किया था श्रीफल भेंट
उल्लेखनीय है कि चार जून को नलबाड़ी विराजित आचार्य श्री ससंघ को गुवाहाटी पधारने व समग्र पूर्वांचल दिगम्बर जैन समाज की ओर से गुवाहाटी में इस वर्ष का चातुर्मास करने के लिए विनय पूर्वक भक्ति के साथ श्रीफल अर्पित कर निवेदन किया था जिसका आशीर्वाद प्रदान करते हुए आचार्य श्री ने पूर्वांचल की समग्र दिगम्बर जैन समाज का चातुर्मास गुवाहाटी में करने की घोषणा की।
इस भव्य मंगल प्रवेश में शामिल स्थानीय समाज के लिए अल्पाहार एवं बाहर से पधारे सभी महानुभावों के लिए अल्पाहार सहित वात्सल्य भोजन की समुचित व्यवस्था भगवान महावीर धर्मस्थल एवं आवास व्यवस्था ए.टी.रोड स्थित महावीर भवन धर्मस्थल में की गई है।
धर्मसभा में होंगे आचार्य श्री के आशीर्वचन
श्री दिगंबर जैन पंचायत गुवाहाटी के अध्यक्ष महावीर जैन हाथीगोला ने बताया कि आचार्य श्री (ससंघ) बुधवार को शाम 4:00 बजे नलबाड़ी से विहार कर रंगिया होते हुए रविवार 11 जून को सुबह पांच बजे पांडू मंदिर से रवाना होकर 6:30 बजे फूलबगान स्थित अपोलो होटल के पास पहुंचेगें। यहां से गाजे-बाजे के साथ जुलूस के रूप में रेलवे गेट नम्बर 8 के पास से होते हुए ए.टी रोड फ्लाइओवर-3 नम्बर रेलवे गेट से फैंसी बाजार स्थित श्री दिगम्बर जैन मंदिर दर्शनार्थ ले जाया जाएगा। वहां से प्रवास एवं चातुर्मास के लिए भगवान महावीर धर्म स्थल में हर्षोल्लास पूर्वक मंगल प्रवेश कराया जाएगा जहां आयोजित धर्मसभा से पूर्व मंगलाचरण, गुरू चित्र अनावरण, आचार्य श्री का पाद प्रक्षालन, शास्त्र भेंट आदि कार्यक्रम संपन्नता के पश्चात् आचार्य श्री का आशीर्वचन होगा।













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