जैन समुदाय को अल्पसंख्यक दर्जा बनाए रखना चाहिए या छोड़ देना चाहिए, इस मुद्दे पर महाराष्ट्र में विवाद खड़ा हो गया है। महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा ने मुंबई में कहा कि जैन धर्म हिंदू संस्कृति का हिस्सा है और उसे अल्पसंख्यक दर्जा छोड़ने पर विचार करना चाहिए। इस बयान के बाद पूरे भारत में समग्र जैन समुदाय में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इंदौर से पढ़िए, यह खबर…
इंदौर। जैन समुदाय को अल्पसंख्यक दर्जा बनाए रखना चाहिए या छोड़ देना चाहिए, इस मुद्दे पर महाराष्ट्र में विवाद खड़ा हो गया है। राजेश जैन दद्दू ने बताया कि महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा ने मुंबई में कहा कि जैन धर्म हिंदू संस्कृति का हिस्सा है और उसे अल्पसंख्यक दर्जा छोड़ने पर विचार करना चाहिए। इस बयान के बाद पूरे भारत में समग्र जैन समुदाय में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। मंत्री ने जैन समुदाय के लोगों को विश्वास में लिए बिना दिए इस बयान से विश्व की जैन समुदाय में नाराजगी देखी जा रही है। जैन अल्पसंख्यक विकास आर्थिक महामंडल के अध्यक्ष ललित गांधी, विश्व जैन संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय जैन, मयंक जैन, डॉ.जैनेंद्र जैन, प्रदीप बड़जात्या ने मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा के बयान पर कड़ा विरोध जताया है। ललित गांधी ने कहा कि यह बयान अज्ञानता से दिया गया है या किसी पूर्व नियोजित रुख का हिस्सा है। डॉ. जैनेंद्र जैन ने कहा कि जैन धर्म भारत का एक स्वतंत्र और प्राचीन दर्शन है।
यह हिंदू धर्म की शाखा या उपशाखा नहीं है। संजय जैन ने कहा कि जैन समुदाय को मिला अल्पसंख्यक दर्जा हमारा संवैधानिक अधिकार है। यह हमारे प्राचीन विरासत के संरक्षण का एक प्रभावी माध्यम है। राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ के प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने मंत्री लोढ़ा विश्व जैन समाज से माफी मांगने और मंत्री पद से इस्तीफा देने की मांग की है।













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