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आचार्य जिनमणी प्रभ सुरीश्वर का रामगंजमंडी में किया स्वागत: गुरुदेव का आशीर्वाद प्राप्त करने की होड सी लग गई


शहर में आचार्य जिन मणीप्रभ सुरीश्वर ने रविवार को मंगल प्रवेश किया। आचारु बाजार नं. 3 में मार्बल से बने भव्य भगवान आदिनाथ के मंदिर की प्रतिष्ठा करवाएंगे। आचार्य सुबह साढ़े 8 बजे जैसे ही नारायण टाकीज चौराहे पर पहुंचे। हजारों लोगो ने हर्ष, उल्लास के साथ उनका स्वागत किया। रामगंजमंडी से अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर…


रामगंजमंडी। शहर में आचार्य जिन मणीप्रभ सुरीश्वर ने रविवार को मंगल प्रवेश किया। आचारु बाजार नं. 3 में मार्बल से बने भव्य भगवान आदिनाथ के मंदिर की प्रतिष्ठा करवाएंगे। आचार्य सुबह साढ़े 8 बजे जैसे ही नारायण टाकीज चौराहे पर पहुंचे। हजारों लोगो ने हर्ष, उल्लास के साथ उनका स्वागत किया। करीब 15 मिनट तक तो यह स्थिति हो गई कि गुरुदेव का आशीर्वाद प्राप्त करने की होड सी लग गई। इस दौरान हर धर्म और समाज के व्यक्ति पहुंचे। श्री आदिनाथ जैन श्वेताम्बर श्रीसंघ अध्यक्ष राजकुमार पारख ने बताया कि आचार्य श्री का नगर प्रवेश ऐतिहासिक रहा। जिसमें सकल जैन श्वेताम्बर श्री संघ के साथ दिगंबर जैन समाज, मेड़तवाल समाज, पोरवाल समाज, गिरिराज धरण संस्था, गुजराती समाज सहित हर समाज के व्यक्ति पहुंचे। वही छत्तीसगढ़ शिरोमणी मनोहर श्रीजी की शिष्याएं साध्वी लयसमिताजी, मृगावली श्रीजी आदि ठाणा 8 भी आचार्य की अगवानी करने आई। सबसे पहले एक छोटी बालिका विशुद्धि बापना ने सिर पर कलश लेकर आचार्य की अगवानी की। फिर श्वेताम्बर समाज की महिलाओं ने सिर पर कलश रखकर अगवानी की और गंवली बनाकर श्रद्धा अर्पित की। बाजार नं. 3 से मंदिर तक लगातार दिगंबर जैन समाज के छोटे-बच्चे बैंड बजाते हुए आचार्य श्री के काफिले के आगे आगे चले।

आचार्य के जयकारे पूरे बाजार नं. 3 को गुंजायमान करते रहे। खरतरगच्छाधिपति को पूरे नगर और अन्य संघों से आए लोग आदिनाथ भगवान के मंदिर तक लेकर आए। जहां आचार्य मणी प्रभ सुरीश्वरजी, गणिवर्य मयंक प्रभ सागर, मुनि विरक्तप्रभ सागर आठांे साध्वी मंडल ने चैत्र वंदन किया और दादावाड़ी में दादा गुरुदेव के दर्शन वंदन किया।

बच्चों ने दी सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुतियां

रामगंजमंडी के बाजार नं. 6 में राजकमल आइल मील के विशाल परिसर में हुआ प्रवेश महोत्सव मंदिर से सीधे आचार्य राजकमल आइल मिल पहुंचे। जहां पूरा डोम जनता से भरा हुआ था। सर्वप्रथम सामूहिक वंदन हुआ। इसके बाद खरतरगच्छ महिला परिषद की जूनियर टीम ने स्वागत गाना गाया। फिर छोटे बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। उसके बाद खरतरगच्छ महिला परिषद की सीनियर टीम ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में रामगंजमंडी ट्रस्ट के विजयकुमार छाजेड़, सुभाष बाफना, राजेंद्र रांका, स्थानक संघ से रूपचंद लाडवा, संजय बीजावत, भानपुरा संघ अध्यक्ष अशोक गोखरू ने अपने विचार व्यक्त किए। संचालन साक्षी पारख ने किया।

भाग्य और सौभाग्य में बड़ा अंतरः साध्वी मृगावती

प्रतिष्ठा महोत्सव में पधारी साध्वी मृगावती ने कहा कि भाग्य और सौभाग्य में बड़ा अंतर है। संपत्ति का मिलना भाग्य है लेकिन, मंदिर का निर्माण करना सौभाग्य है। सीए, इंजीनियर, डॉक्टर बनना भाग्य है लेकिन, जिन शासन की शान बढ़ाना सौभाग्य है। भाग्य तो सभी को मिलता है पर रामगंजमंडी में सौभाग्य राजकुमार पारख को मिला।

मंदिर पर काला टीका लगाने की जरूरत

खरतरगच्छाधिपति ने कहा कि हम 2 से 3 वर्षों में बने मंदिर को अच्छी टाइमिंग मानते हैं। कई-कई मंदिर तो 10 वर्षों तक पूरे नहीं होते लेकिन, रामगंजमंडी का मंदिर सिर्फ 7 महीने 7 दिन में पूर्ण होना वास्तव में किसी चमत्कार से कम नहीं। मेरी जिंदगी में यह पहला मंदिर है। जिसकी प्रतिष्ठा करवाते वक्त कोई कार्य बाकी नहीं रहा। उन्होंने इस ऐतिहासिक मंदिर निर्माण के कार्य का पूरा-पूरा श्रेय राजकुमार पारख (अध्यक्ष) और उनकी टीम को दिया। वहीं, आचार्य ने पूर्व पार्षद साक्षी पारख के कार्यों को बेहतर बताया। आचार्य ने कहा कि मंदिर इतना खूबसूरत बना है कि किसी की नजर नहीं लगे, इसलिए राजकुमार पारख को काला टीका लगाने को कहा। प्रतिष्ठा महोत्सव में 15 तारीख को भगवान आदिनाथ विराजमान होंगे। आदिनाथ भगवान के गुणों को जीवन में जीने की नसीहत देते हुए आचार्य ने कहा कि हर ग्रंथ, हर वेद पुराण में आदिनाथ भगवान का वर्णन है। आदिनाथ भगवान के पुत्र भरत चक्रवर्ती के नाम पर ही देश का नाम भारत रखा गया। आचार्य श्री ने कहा कि घर में जमाई आवे तो चांदी की थालियां निकल जाती हैं। नेता आवे तो गलियां और सड़कें साफ हो जाती हैं। प्रधानमंत्री आए तो पांव जमीन पर नहीं टिकते। फिर रामगंजमंडी की धरती पर तो स्वयं भगवान पधार रहे हैं, सोचो कितना आनंद होगा।

प्रतिष्ठा महोत्सव में सहयोग देने वालों का किया सम्मान

श्रीआदिनाथ ट्रस्ट ने छप्पन भोग रिसोर्ट फ्री देने पर मोहन चौधरी और बालमुकुंद गुप्ता, गोवर्धन नाथ मंदिर देने के लिए नितिन माहेश्वरी, होटल देने पर चेरी भाई सलूजा, नसियाजी देने पर दिलीप विनायका, मेघवाल धर्मशाला देने पर राजेंद्र गुप्ता, भगवान सुमतिनाथ का मुकुट, कुंडल देने पर टीकम मित्तल और भूमि पूजन एवं खनन का लाभ लेने वाले ज्ञानचंद डागी, मंदिर के मुख्य कारीगर आरिफ मकराना एवं घिसाई का कार्य करने वाले रेशमाराम पिंडवाड़ा को प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया। इस दौरान गरोठ संघ ने राजकुमार पारख को सम्मानित किया।

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