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आठ दिवसीय श्री कल्पद्रुम महामंडल विधान के चौथे दिन गुरुओं के महत्व पर हुए प्रवचन : पंथवाद को छोड़, दिगम्बरत्व के मूल गुणों को नमन करें – मुनि श्री पूज्य सागरजी


अतिशय क्षेत्र श्री दिगम्बर जैन नवग्रह जिनालय ग्रेटर बाबा की पुण्य भूमि पर चल रहे श्री 1008 कल्पद्रुम महामंडल विधान के चौथे दिन अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर ने कहा कि मेरे जीवन का एक-एक क्षण श्रवणबेलगोला के समाधिस्थ भट्टारक चारूकीर्ति जी महास्वामी एवं मेरे दीक्षा गुरु समाधिस्थ आचार्य श्री 108 अभिनन्दन सागरजी को समर्पित है क्योंकि जिस तरह एक मटके को अन्दर से हाथ डाल कर ठोक-पीट कर गोल बनाया जाता है, उसी तरह सच्चा-अच्छा एवं मटके के जैसा दूसरों को शीतल करने वाला बनने के लिए गुरु का सानिध्य होना जरूरी है। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…


इंदौर। अतिशय क्षेत्र श्री दिगम्बर जैन नवग्रह जिनालय ग्रेटर बाबा की पुण्य भूमि पर चल रहे श्री 1008 कल्पद्रुम महामंडल विधान के चौथे दिन अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज ने प्रवचन में कहा कि जीवन में हर व्यक्ति का जन्म और मरण होता है।

संसार में जितने भी जीव हैं, आज के दौर में सभी दुखी हैं। संसार की चारों गतियों में दुख बना हुआ है।

गुरु की वाणी सुनकर सुख आ जाता है। गुरु किसी भी संत या पंथ के हों, गुरु गुरु ही होते हैं।

धर्म, शास्त्र या साधु की निंदा करने वाला नारकीय जीव होता है।

गुरु के हाथ के स्पर्श से ही मानव के सभी रोग दूर हो जाते हैं।

उन्होंने कहा कि 28 मूल गुणों को धारण करने वाला दिगंबर साधु ही आपके जीवन को तारता है।

आज श्वेताम्बर- दिगंबर के साथ व्यक्तिगत संतों के नाम पर समाज संतों और पंथों में बंट गया है।

गुरुओं के प्रति आपकी आस्था व श्रद्धा से आपके नौ ग्रहों के साथ-साथ 27 नक्षत्र भी सुखदाता होते हैं।

मुनि पूज्य सागर ने कहा कि मेरे जीवन का एक-एक क्षण श्रवणबेलगोला के समाधिस्थ भट्टारक चारूकीर्ति जी महास्वामी एवं मेरे दीक्षा गुरु समाधिस्थ आचार्य श्री 108 अभिनन्दन सागरजी को समर्पित है क्योंकि जिस तरह एक मटके को अन्दर से हाथ डाल कर ठोक-पीट कर गोल बनाया जाता है,

उसी तरह सच्चा-अच्छा एवं मटके के जैसा दूसरों को शीतल करने वाला बनने के लिए गुरु का सानिध्य होना जरूरी है।

आज समाज में संत-पंथ को लेकर मनमुटाव बढ़ते जा रहे हैं।

ऐसे में हमें दिगम्बरत्व के मूल गुणों का पालन करने वाले साधुओं को एक सामान मानना चाहिए, न कि तेरा-मेरा कर समाज को विघटन की ओर ले जाना चाहिए।

मुनि श्री के गृहस्थ परिवार ने की सहभागिता

विधान में इंदौर के अलावा निकटतम विभिन्न प्रान्तों से पधारे सधर्मी बंधु अपने सांसारिक जीवन में आ रहे दुखों का नाश करने के लिए सहभागिता ले रहे हैं।

धार्मिक माहौल में हर्षोल्लास के साथ भक्ति भाव के साथ अपने जीवन में पुण्यों का संचय करते हुए प्रातः काल सूर्य की प्रथम किरण के साथ ललित-निखिल कुमार छाबड़ा (निखिल टेंट हाउस) द्वारा स्वयं व राष्ट्र की उन्नति के लिए मुनिश्री के मुखारविन्द बीजा अक्षर मंत्रोच्चार के साथ शांतिधारा की गई।

सुमधुर वाद्यों के साथ प्राची सौरभ छाबड़ा, स्मृति नगर ने मंगलाचरण की प्रस्तुति दी।

इस अवसर पर मुनिश्री के गृहस्थ परिवार के परिजन दीपक, रश्मि, बबिता सहित पूरे परिवार ने दीप प्रज्वलन कर परिसर को अलौकिक इन्द्रधनुषी रंगों से प्रकाशमान किया।

मुनि श्री के पाद प्रक्षालन का लाभ श्री दिगंबर जैन महिला मंडल, सुदामा नगर ने लिया।

जिनवाणी भेंट का लाभ भी मुनि श्री के गृहस्थ परिवार को प्राप्त हुआ।

महामंडल विधान महोत्सव समिति के प्रमुख नरेन्द्र वेद, विकास जैन ने सभी अतिथियों का माला-तिलक लगा कर सम्मान किया।

समस्त कार्यक्रम पंडित नितिन झांझरी, पंडित किर्तेश जैन, पंडित विनोद पगारिया के सानिध्य में हो रहा है।

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