जैन धर्म की प्राचीन विरासत, पांडुलिपियों और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण में कासलीवाल परिवार का योगदान प्रेरणादायी रहा है। कुंदकुंद ज्ञानपीठ और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से परिवार नई पीढ़ी को धर्म एवं संस्कृति से जोड़ने का सतत कार्य कर रहा है। पढ़िए श्रीफल साथी आनंद जैन कासलीवाल का पत्र ।
इंदौर। किसी भी समाज की वास्तविक पहचान उसकी संस्कृति, परंपराओं और ज्ञान-संपदा से होती है। जैन धर्म की प्राचीन विरासत, दुर्लभ पांडुलिपियों तथा सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण के क्षेत्र में कासलीवाल परिवार का योगदान समाज के लिए प्रेरणास्रोत माना जाता है।
ज्ञान संरक्षण का ऐतिहासिक संकल्प
परम आदरणीय स्वर्गीय श्री हुकुमचंद जी कासलीवाल, श्री देव कुमार सिंह जी कासलीवाल, श्री अजीत कुमार सिंह जी कासलीवाल एवं श्री प्रदीप जी कासलीवाल ने जैन धर्म एवं संस्कृति के संरक्षण के उद्देश्य से अनेक महत्वपूर्ण कार्य किए। विशेष रूप से कुंदकुंद ज्ञानपीठ की स्थापना कर प्राचीन जैन ग्रंथों, दुर्लभ पांडुलिपियों और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण का महत्वपूर्ण अभियान प्रारंभ किया, जो आज भी निरंतर प्रगति पर है।
समाज को जोड़ने का सफल प्रयास
श्री प्रदीप जी कासलीवाल ने सोशल ग्रुप फेडरेशन के माध्यम से देशभर के जैन समाज को एक मंच पर जोड़ने, नई पीढ़ी को नेतृत्व प्रदान करने तथा युवाओं को धर्म एवं संस्कृति से जोड़ने का उल्लेखनीय कार्य किया। यह पहल सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक जागरूकता का उत्कृष्ट उदाहरण बन चुकी है।
नई पीढ़ी निभा रही विरासत की जिम्मेदारी
वर्तमान में पूजनीय श्रीमती पुष्पा जी कासलीवाल के मार्गदर्शन एवं आशीर्वाद में श्री आदित्य जी कासलीवाल और श्री अमित जी कासलीवाल कुंदकुंद ज्ञानपीठ के कार्यों का सफल संचालन कर रहे हैं। हाल ही में परम पूज्य आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज एवं मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज के सानिध्य में आयोजित तीन दिवसीय विद्वत् संगोष्ठी ने यह संदेश दिया कि नई पीढ़ी भी जैन धर्म और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए पूर्णतः समर्पित है।
सेवा और समर्पण की अनूठी परंपरा
कासलीवाल परिवार की विशेषता यह है कि धर्म, शिक्षा और समाजहित के अधिकांश कार्यक्रम परिवार के अपने संसाधनों से संचालित किए जाते हैं। महावीर ट्रस्ट, उदासीन आश्रम और कुंदकुंद ज्ञानपीठ जैसी संस्थाओं के माध्यम से सेवा, संस्कार और समर्पण की परंपरा को निरंतर आगे बढ़ाया जा रहा है।
समाज के लिए प्रेरणास्रोत
आज जब सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण की आवश्यकता पहले से अधिक महसूस की जा रही है, ऐसे समय में कासलीवाल परिवार का समर्पण पूरे समाज के लिए प्रेरणादायी है। यह केवल एक परिवार की उपलब्धियों का परिचय नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी संस्कृति, आध्यात्मिक विरासत और मूल्यों के संरक्षण का संकल्प लेने का संदेश भी है।
समापन
जैन समाज की ज्ञान-परंपरा को सशक्त बनाने, सांस्कृतिक धरोहरों को सुरक्षित रखने तथा सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने में कासलीवाल परिवार का योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए अनुकरणीय रहेगा।













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