गुरु शिक्षक माता, पिता ,परिजन का टोकना गलत लगता हैं किंतु वह जीवन की भलाई के लिए कहते हैं। विवेक द्वारा आप उनके कहने का गुण दोष समझ सकते हैं। विवेक से पुण्य का अर्जन होता है। यह धर्म देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने विहार के समय धर्मसभा में प्रकट की। लूंणवा से पढ़िए, डॉ.राजेश पंचोलिया की यह खबर…
लूंणवा। जीवन में सर्वसंपन्नता विवेक और विनय गुण से प्राप्त होती है। आपको गुरु शिक्षक माता, पिता,परिजन का टोकना गलत लगता हैं किंतु वह जीवन की भलाई के लिए कहते हैं। विवेक द्वारा आप उनके कहने का गुण दोष समझ सकते हैं। विवेक से पुण्य का अर्जन होता है। यह धर्म देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने विहार के समय धर्मसभा में प्रकट की। आचार्य श्री ने कहा कि विवेक से हम अतीत और भविष्य को समझ सकते हैं। वर्तमान ठीक करेंगे तो भविष्य भी हमारा ठीक होगा। विवेक से ज्ञान मिलता है। विवेक और ज्ञान एक दूसरे के पूरक है और ज्ञान हमें स्वाध्याय से मिलता है। स्वाध्याय स्वयं निज आत्मा का अध्ययन होता है।
आदिनाथ से लेकर महावीर स्वामी का जीवन हमारे समक्ष
स्वाध्याय से हम वर्तमान भविष्य की तैयारी कर सकते हैं। जन्म मरण से गति पर्याय जो मिलती है वह किए गए कार्यों के अनुसार पुण्य या पाप अनुसार प्राप्त होती है। भगवान आदिनाथ से लेकर महावीर स्वामी तक का जीवन हमारे समक्ष है कि वह कैसे महापुरुष भगवान बने हैं। आचार्य श्री ने बताया कि भगवान महावीर सिंह की पर्याय में होने के बावजूद पुण्य से महावीर स्वामी बने हैं।
आचार्य कल्प श्री श्रुत सागर जी का पूजन होगा
प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की परंपरा में प्रथम पट्टाधीश आचार्य श्री वीरसागर जी महाराज से दीक्षित आचार्य कल्प श्री श्रुतसागर जी महाराज की प्रतिमा उनकी समाधि स्थली अतिशय क्षेत्र लूणवा जिला नागौर में 27 जून को परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ 37 पिच्छी के सानिध्य में मंत्रोचार विधिपूर्वक विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान सहित विराजित की जाएगी। इस अवसर पर आचार्य संघ के आगमन के पश्चात आचार्य कल्प श्री श्रुत सागर जी महाराज का पूजन होगा।
महिलाओं की कलशयात्रा निकाली जाएगी
महिलाओं की कलशयात्रा के बाद ध्वजारोहण, कलश स्थापना चित्र अनावरण ,दीप प्रज्वलन, आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के चरण प्रक्षालन, पूजन, जिनवाणी भेंट, विभिन्न पुण्यार्जक परिवारों द्वारा धार्मिक क्रिया की जाएगी। आचार्य श्री के प्रवचन के बाद आचार्य कल्प श्री श्रुत सागर जी की प्रतिमा पूर्ण विधि विधान मंत्रोच्चार से पुण्यार्जक द्वारा विराजित होगी।













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