गुना में आयोजित पंचमुखी पंचकल्याणक महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ के दौरान राष्ट्रसंत मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज ने आत्मसंयम, धर्म और सदाचार का संदेश दिया। महायज्ञ में सवा लाख मंत्रों की आहुतियां समर्पित की गईं। पढ़िए श्रीफल साथी राजीव सिंघई की यह रिपोर्ट।
गुना। शीतल धाम में आयोजित पंचमुखी पंचकल्याणक महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ के दौरान राष्ट्रसंत मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज ने विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि मनुष्य को जीवन में ऐसा कोई पाप नहीं करना चाहिए, जिसे उसकी आत्मा स्वयं स्वीकार न करे। उन्होंने कहा कि यदि आत्मा, माता-पिता और गुरु किसी कार्य से रोकते हैं, तो उस कार्य से दूर रहना ही सच्चा धर्म है।
आत्मा की आवाज सबसे बड़ा मार्गदर्शक
मुनिश्री ने कहा कि जीवन में वही कार्य करें, जिसे करते समय आत्मा साक्षी बने। यदि किसी कार्य को करने में भीतर से भय या ग्लानि महसूस हो, तो उसे तत्काल छोड़ देना चाहिए। यही आत्मशुद्धि और धर्ममार्ग की पहली सीढ़ी है।
भगवान शीतलनाथ जिनालय की प्रतिष्ठा संपन्न
महोत्सव के दौरान भगवान श्री शीतलनाथ जिनालय की प्रतिष्ठा विधि-विधान से संपन्न हुई। प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भइया के निर्देशन एवं मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज ससंघ के सान्निध्य में सौधर्म इंद्र अखिलेश जैन, महायज्ञ नायक डॉ. प्रीतेश जैन तथा मुख्य यजमान डॉ. राहुल जैन ने पूजन एवं प्रतिष्ठा विधान में सहभागिता निभाई।
28 जून को केंद्रीय मंत्री सिंधिया करेंगे दर्शन
मध्यप्रदेश महासभा संयोजक विजय धुर्रा ने बताया कि 28 जून को दोपहर 4 बजे केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया मुनि सुब्रतनाथ जिनालय पहुंचकर मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज ससंघ के दर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। इस अवसर पर महोत्सव समिति के अध्यक्ष एस.के. जैन, महामंत्री प्रदीप जैन एडवोकेट, कोषाध्यक्ष संजीव वगुल्या, मनोज स्वराज, तरुण जैन, अनिल जैन, अखिलेश जैन, अरविंद जैन, टीटू म्यान, शैलेन्द्र पाटई, महावीर वेल्कम सहित समाज के अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहेंगे।
विश्व शांति महायज्ञ में सवा लाख मंत्रों की आहुतियां
विश्व शांति महायज्ञ के अंतर्गत अरिहंत कुंड पर पंडित सुरेश शास्त्री, देवेन्द्र शास्त्री एवं अन्य विद्वानों के मंत्रोच्चार के बीच सवा लाख मंत्रों के साथ आहुतियां समर्पित की गईं। इस दौरान भगवान पर विशाल छत्र एवं चंवर अर्पित किए गए तथा श्रद्धालुओं ने धर्मलाभ प्राप्त किया।
धर्म के लिए एक दिन जीकर देखिए
धर्मसभा में मुनिश्री ने कहा कि मनुष्य को कम से कम एक दिन अपने जीवन को गुरु और भगवान की आज्ञा के अनुसार जीकर देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि धर्म केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि जीवन जीने की साधना है। जब व्यक्ति अपने जीवन में धर्म को सर्वोच्च स्थान देता है, तभी आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है।
श्रद्धालुओं से सहभागिता का आग्रह
महोत्सव समिति ने सभी श्रद्धालुओं से आगामी कार्यक्रमों में अधिकाधिक संख्या में उपस्थित होकर धर्मलाभ लेने का आग्रह किया। पंचमुखी पंचकल्याणक महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ निरंतर संपन्न हो रहा है।













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