वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी एवं आचार्य श्री प्रज्ञा सागर जी के सानिध्य में रामलीला मैदान, जयपुर में 30 मार्च को भगवान महावीर स्वामी का 2625वां जन्म कल्याणक भक्ति एवं उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने कहा कि वर्तमान समय में विश्व अशांति से ग्रसित है और शस्त्रों की होड़ बढ़ रही है। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…
जयपुर। वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी एवं आचार्य श्री प्रज्ञा सागर जी के सानिध्य में रामलीला मैदान, जयपुर में 30 मार्च को भगवान महावीर स्वामी का 2625वां जन्म कल्याणक भक्ति एवं उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने कहा कि वर्तमान समय में विश्व अशांति से ग्रसित है और शस्त्रों की होड़ बढ़ रही है। ऐसे समय में 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी का अहिंसा एवं शांति का संदेश अत्यंत प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि आज परिवार, समाज, राज्य और विश्व में अशांति का कारण भोगमय जीवन है। जब तक मनुष्य भोग की प्रधानता को नहीं छोड़ेगा, तब तक उसे वास्तविक सुख और शांति प्राप्त नहीं हो सकती। आचार्य श्री ने बताया कि भगवान महावीर का जन्मकल्याणक इसलिए मनाया जाता है क्योंकि उनका जन्म अंतिम होता है और वे भगवान बनते हैं, जबकि सामान्य मनुष्य केवल जन्मदिन मनाता है। उन्होंने जीवन में रत्नत्रय धर्म और वैराग्य को अपनाकर आत्मा को परमात्मा बनाने का पुरुषार्थ करने का आह्वान किया।

आचार्य प्रज्ञा सागर जी का संदेश
आचार्य श्री प्रज्ञा सागर जी ने अपने उद्बोधन में आगामी वर्ष महावीर जयंती पर 24 तीर्थंकरों के रथ एवं 24 जिनवाणी माता की पालकी यात्रा निकालने की घोषणा की। उन्होंने समाज के प्रत्येक व्यक्ति से कम से कम एक व्यक्ति को शाकाहारी बनाने का संकल्प लेने का आह्वान किया।
भव्य शोभायात्रा
महावीर जयंती के उपलक्ष्य में राजस्थान जैन महासभा द्वारा सकल जैन समाज जयपुर के सहयोग से नगर के प्रमुख चौराहों से 24 तीर्थंकरों के रथ एवं आकर्षक झांकियों के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली गई। मार्ग में स्थान-स्थान पर भगवान की मंगल आरती की गई। शोभायात्रा का समापन रामलीला मैदान पर हुआ।
कार्यक्रम स्थल पर ध्वजारोहण का लाभ श्री विवेक काला परिवार ने प्राप्त किया, जबकि भगवान महावीर के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन श्रीपाल एवं श्री सुरेश सबलावत परिवार द्वारा किया गया। आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन का सौभाग्य प्रमोद पहाड़िया को प्राप्त हुआ तथा जिनवाणी भेंट सुधांशु कासलीवाल द्वारा की गई।
इसके पश्चात सभी 24 तीर्थंकरों का अभिषेक एवं शांतिधारा कर भगवान महावीर स्वामी की विधिपूर्वक पूजन की गई।
विशेष उपलब्धि
30 मार्च को सभी 24 तीर्थंकरों के समक्ष 2625 चंवरों से नृत्य भक्ति कर विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया गया, जिसका प्रमाणपत्र भी प्रदान किया गया। इस अवसर पर सुभाष जैन ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में स्मारिका का विमोचन किया गया। मंच संचालन आचार्य श्री प्रज्ञा सागर जी द्वारा एवं सभा संचालन मनीष वैद द्वारा किया गया।













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