भोपाल में मुनिश्री सर्वार्थसागरजी महाराज के प्रवचन में समाजजनों को ज्ञान, सीख और प्रेरणादायक विचारों का लाभ प्राप्त हो रहा है। यहां नित धर्मसभा में मुनिश्री की देशना हो रही है। सोमवार को भी उन्होंने प्रवचन के दौरान सभा को संबोधित किया। भोपाल से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की यह खबर…
भोपाल। पट्टाचार्य विशुद्ध सागर महाराज ससंघ भोपाल में विराजमान हैं। पट्टाचार्य विशुद्ध सागर महाराज जी के शिष्य मुनि श्री सर्वार्थ सागर जी ने अपने प्रवचन में कहा कि दो तरह से चीजें छोटी नजर आती हैं। एक दूर से और दूसरी गुरुर से। जब हम किसी चीज़ से दूर होते हैं, तो उसका महत्व समझ नहीं आता। मां-बाप की डांट बचपन में बोझ लगती है लेकिन, जब उनसे दूर होते हैं तो उनकी हर बात में ममता दिखती है। यही दूरी जब रिश्तों में आती है तो प्यार भी छोटा और बेमतलब लगने लगता है। दूसरी ओर गुरुर यानी अहंकार ये सबसे बड़ा धोखा है। जब अहंकार आता है तब इंसान दूसरों की अच्छाइयां देख ही नहीं पाता। सब छोटे लगने लगते हैं और खुद को सबसे ऊपर समझता है लेकिन, याद रखिए ऊंचाई पर अकेलापन होता है और नीचे खड़े लोग ही आधार बनते हैं।
अरिहंत जैन भिंड ने अवगत कराया कि मुनि श्री सर्वार्थ सागर जी ने कहा कि कभी भी इस भ्रम में मत रहिए कि आप सबसे बेहतर हैं क्योंकि, जब तक आप दूसरों की अहमियत नहीं समझेंगे तब तक आपकी अपनी अहमियत भी कोई नहीं समझेगा। इसलिए ज़िंदगी में अगर बड़ा बनना है तो न दूरी बनाओ और न घमंड पालो। हर किसी को उसकी जगह दो, सम्मान दो क्योंकि, जो झुकता है, वही सबसे ऊंचा उठता है।













Add Comment