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श्री कल्पद्रुम महामंडल विधान में देश के कई राज्यों से आए श्रावक ले रहे हैं हिस्सा : भगवान की वेदी का मार्जन करना भी पूजा ही होती है – मुनि श्री पूज्य सागर जी


जैन धर्म का सिद्धांत भी द्रव्य व भाव पर टिका हुआ है। जब आप द्रव्य चढ़ाते हैं, तब उसके भाव बदल जाते हैं। आपके भाव आपके परिणाम व आपके द्रव्य पर टिके हैं। पूजा पुण्य बढ़ाने का काम करती है। यह बात अतिशय क्षेत्र श्री दिगम्बर जैन नवग्रह जिनालय ग्रेटर बाबा की पुण्य भूमि पर चल रहे श्री 1008 कल्पद्रुम महामंडल विधान के तीसरे दिन अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागरजी महाराज ने कही। इस अवसर पर कई धार्मिक कार्यक्रम भी हुए। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट..  


इंदौर। भगवान की आराधना व उपासना हम श्री 1008 कल्पद्रुम महामंडल विधान में कर रहे हैं।

जैसे शेर व गाय एक साथ पानी पीते हैं, जैन धर्म का सिद्धांत भी कुछ ऐसे ही द्रव्य व भाव पर टिका हुआ है।

जब आप द्रव्य चढ़ाते हैं, तब उसके भाव बदल जाते हैं। व्यक्ति होटल, ढाबे व घर पर खाना खाता है, तब उसके भाव में परिवर्तन होता है।

आपके भाव आपके परिणाम व आपके द्रव्य पर टिके हैं। पूजा पुण्य बढ़ाने का काम करती है।

यह बात अतिशय क्षेत्र श्री दिगम्बर जैन नवग्रह जिनालय ग्रेटर बाबा की पुण्य भूमि पर चल रहे श्री 1008 कल्पद्रुम महामंडल विधान के तीसरे दिन अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागरजी महाराज ने कही।

मुनि श्री ने कहा कि आचार्य भगवंत ने कहा है कि 35 प्रकार की पूजा होती है, भगवान की वेदी का मार्जन करना भी पूजा ही होती है।

आप किसी भी प्रकार की सेवा से भगवान की पूजा कर सकते हैं।

मंदिर जी की झाड़ू लगाना भी पूजा ही होती है, जो आपके पुण्य संचय को बढ़ाती है।

आपके आलीशान मकान में भगवान का स्थान रसोई घर या स्टोर रूम में ही होता है, तभी आपको अपने घर- परिवार के विवाह संबंध या स्वास्थ्य लाभ के लिए कुंडली दिखाने की जरूरत होती है।

बनाया जीवन को सार्थक

इसके पूर्व मालवा प्रांत की गुलाबी ठंडक में ऐतिहासिक, अकल्पनीय, मनमोहक साज सज्जा से सुशोभित आकर्षक पंडाल में वर्ष 2024 के प्रथम दिन के शुभ अवसर पर मुख्य शांतिधारा जयपुर निवासी कंवरीलाल- सुमित्रा जैन की ओर से की गई।

उनके साथ ही कमलेश -सुरेशचंद जैन, गजेन्द्र जैन, महेंद्र जैन, विनोद जैन, विकास जैन के परिवारों द्वारा वृहद शांतिधारा अपने कुल परिवार, समाज व राष्ट्र की सुख-शांति की भावना को लेकर पंडित नितिन झांझरी, पंडित विनोद पगारिया, पंडित किर्तिश वगिरिया के सानिध्य में की गई।

इस मौके पर श्रावकों ने पूज्य गुरुदेव के मुखारविन्द से शक्तिरुपाय चेतन्य मंत्रोच्चार के मध्य शांतिधारा कर नित्यनियम की पूजा व अर्घ्य के साथ श्री 1008 कल्पद्रुम महामंडल विधान की पूजा का लाभ लेते हुए अपने मानव जीवन की सार्थकता को गति प्रदान की।

आज के चक्रवर्ती बनने का सौभाग्य प्रमोद जैन, प्रद्युम्न जैन, पवन संगीता जैन, अनिल- निधि सम्मैया को प्राप्त हुआ।

भक्ति भाव से की चरण वंदना

महामहोत्सव के तीसरे दिन दीप प्रज्वलन गुप्ती सदन मंदिर परिवार, कालानी नगर ने किया।

मुनिश्री का पाद-प्रक्षालन सूरजमल, संजय कुमार, रेखा पाटनी परिवार ने भक्ति भाव से चरण वंदन के साथ किया।

इसके साथ ही जिनवाणी भेंट करने का सौभाग्य वीरेन्द्र कुमार बड़जात्या परिवार धार व अभय कुमार जैन परिवार को मिला।

मंगलाचरण नैना कासलीवाल, प्राची छाबड़ा, पिंकी कासलीवाल, रुपाली अजमेरा, टीना जैन, अन्नू पाटनी ने संगीतमय मंत्रमुग्ध स्तवनों पर किया।

इसके साथ ही इंदौर के चंद्रप्रभु महिला मंडल, श्री दिगंबर जैन अंजनी नगर महिला मंडल, श्री दिगंबर जैन एल. एन. सिटी महिला मंडल व इन्द्र सेठी सहित अनेकों समाज श्रेष्ठियों ने मुनिश्री को श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

ले रहे हैं धर्मलाभ

महोत्सव समिति के प्रमुख संयोजक नरेन्द्र वेद एवं कमलेश जैन ने बताया कि विधान महोत्सव में इंदौर शहर ही नहीं अपितु राजस्थान, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र सहित अन्य प्रान्तों से श्रावक-श्राविकाएं सम्मिलित होकर धर्म लाभ ले रहे हैं।

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