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जैन धर्म समाज, साहित्य और संस्कृति में अतुलनीय योगदान : जैन समाज में शरद पूर्णिमा की धवल चांदनी सी चमक रही हैं ज्ञानमति माताजी

सन् 1934 की शरद पूर्णिमा के शुभ दिन जब चन्द्रमा की शुभ्र छटा सम्पूर्ण धरा को अपने आवेश में समेटे थे, तब उ.प्र. के बाराबंकी जनपद के ग्राम टिकेतनगर में बाबू...

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जीवन में गहरा असर डालते हैं पंचक : पंचक क्या हैं और क्यों लगते हैं -ज्योतिषाचार्य हुकुमचंद जैन

ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन के अनुसार यू तो पंचक हर माह पांच दिनों के लिए लगते है सोमवार,बुधवार,गुरुवार को प्रारंभ होने वाले पंचक शुभ फल देने वाले होते हैं।...

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हमारे उत्सवों के स्तर और गरिमा का सवाल : कार्यक्रमों के गुणात्मक स्तर को भी सुधार लें तो ये होंगे ज्यादा प्रभावशाली और सार्थक-प्रो. अनेकांत कुमार जैन

प्रो. अनेकांत कुमार जैन, सलाहकार, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग का चिंतन है कि चातुर्मास में भव्याति भव्य कार्यक्रम होते हैं। प्रायः सभी कार्यक्रमों को ऐतिहासिक और...

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चिंतन का विषय बच्चों को शुरू से ही देने होंगे जैन संस्कार : धर्मांतरण पर चिंता नहीं, चिंतन की आवश्यकता

भी हाल ही में गाजियाबाद व दमोह की घटनाओं में जैन धर्मावलम्बियों को इस्लाम धर्म कबूल करते व मुस्लिम होते देखा गया। जिससे हम सब जैन धर्म के अनुयायी चिंता में आ...

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ज्ञान का अमृत पर्व है श्रुत पंचमी : भगवान महावीर के दर्शन को पहली बार प्रस्तुत किया गया था लिखित ग्रंथ में 

श्रुत पंचमी महापर्व के दिन जैन धर्म के प्रथम ग्रंथ को लिपिबद्ध किया गया था। इससे पूर्व सभी ज्ञान को अपने कंठ में रखने की परंपरा थी तथा एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी...

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श्रुत पंचमी विशेष: पहले तीर्थंकर केवल उपदेश देते थे, तब तीर्थंकरों की वाणी को लिखने की परंपरा नहीं थी, पहली बार तीर्थंकर महावीर की ज्ञानवाणी को लिपिबद्ध किया गया

जैन दर्शन में जैसे तीर्थंकर भगवंतों की जन्म जयंती मनाते है, वैसे ही श्रुत पंचमी का महापर्व मनाया जाता है। श्रुत पंचमी को संस्कृत, प्राकृत, अपभ्रंश भाषा के...

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प्रशममूर्ति आचार्य श्री 108 शान्ति सागर जी महाराज 'छाणी' के समाधि दिवस पर विशेष : दिगंबर साधुओं के विहार का मार्ग किया था प्रशस्त 

परम पूज्य आचार्य श्री 108 शान्ति सागर जी महाराज ‘छाणी’ ने 17 मई, 1944 को राजस्थान के सागवाड़ा नगर में समाधिपूर्वक मरण कर इस नश्वर देह का त्याग किया।...

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श्री दि.जैन ज्ञानतीर्थ क्षेत्र मुरैना के हैं प्रणेता : सराकोद्धारक आचार्य ज्ञानसागर महाराज के अवतरण दिवस पर विशेष

धर्म नगरी मुरैना में ही 01 मई 1957 को श्री शांतिलाल जैन (विचपुरी वाले) के घर माता श्रीमती अशर्फी देवी जैन की कोख से बालक उमेश का जन्म हुआ। पूज्य गुरुदेव भगवान...

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महावीर जन्मकल्याणक पर विशेष : विश्व को आवश्यकता भगवान् महावीर स्वामी की

सम्प्रति काल में अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्चर्य की उतनी ही आवश्यकता है, जितनी भगवान् महावीर स्वामी के काल में थी। पूर्व में धर्म के नाम से हिंसा होती थी।...

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महावीर जन्म कल्याणक विशेष : इन 21 प्रश्नों के उत्तर से परखिए खुद, कितना जानते हैं आप भगवान महावीर को

कितना जानते हैं आप जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर को, तो इन 21 प्रश्नों और उनके उत्तरों से जानें, कितना है आपका ज्ञान भगवान महावीर के बारे में। महावीर स्वामी के...

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