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सामूहिक आचरण में तो बने रहें जैन : सोचिए आने वाली पीढ़ी को क्या देकर जाएंगे हम

जैन धर्म में सात्विक भोजन करने का उपदेश तीर्थंकरों ने दिया। पूरे विश्व में जैन समाज की पहचान भी इसी से है। समय के चलते आज जैन परिवार भी जमीन में उगने वाले कंद...

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आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का समाधिमरण : राष्ट्र निर्माण के प्रति प्रतिबद्ध थे आचार्य श्री

संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज जी, देशवासियों के हृदय और मन-मस्तिष्क में सदैव जीवंत रहेंगे। आचार्य जी के संदेश उन्हें सदैव प्रेरित और आलोकित...

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कहानी जिन मंदिरों की : अतिशय्पूर्ण गोपाचल पर्वत, जहां हैं 6 इंच से लेकर 57 फीट की डेढ़ हजार से ज्यादा जैन प्रतिमाएं

  24 जैन तीर्थंकरों की आश्चर्यजनक रॉक-कट मूर्तियों से सजा जैन सिद्ध क्षेत्र गोपाचल ग्वालियर में है। चट्टान से उकेरी गई इन प्रभावशाली मूर्तियों का दौरा...

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धर्म का मर्म में जानिए वसंत पंचमी का महत्व : बसंत पंचमी से माघ मास वाला दसलक्षण पर्व होता है प्रारंभ

बसंत पंचमी से माघ मास वाला दसलक्षण पर्व प्रारंभ होता है, वसंत पंचमी को ही आचार्य कुंदकुंद देव की जन्म तिथि है, ये सरस्वती की आराधना का दिन है। पढ़िए राजेश जैन...

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चिंतन का विषय : राम मंदिर के रूप में दूर हुआ विवाद, क्या जैन यक्ष-यक्षिणी से जुड़े विवाद होंगे दूर

 यह सत्य है कि राम उत्सव देश का उत्सव था। हमें सब को मानना चाहिए था, नहीं मनाते तो ऐसा लगता कि समाज का हिस्सा नहीं है लेकिन क्या अपने अस्तित्व, स्वरूप को...

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समाज मे अविवाहित युवकों की बढ़ रही संख्या : समाज का बिगड़ रहा ताना-बाना

समाज मे अविवाहित युवकों की संख्या लगातार बढ़ रही है जिससे समाज का ताना-बाना बिगड़ रहा है। इसका बड़ा कारण है अब मध्यस्थ का अभाव है। कोई किसी को सम्बन्ध बताने तैयार...

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राम मंदिर जीवन में उतारें प्रभु श्रीराम का एक गुण : लें प्रतिज्ञा नहीं छोड़ेंगे अपने माता-पिता को वृद्धाश्रम में

देश के इतिहास में एक पन्ना और जुड़ जाएगा, जब सैकड़ों वर्षों के बाद आगामी 22 जनवरी को अयोध्या में बने भव्य मंदिर में जन- जन की आस्था के केंद्र  भगवान श्रीराम...

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विश्व हिंदी दिवस पर विशेष आलेख : हिंदी से मुमकिन है देश की तरक्की

जैन आचार्य विद्यासागर महाराज ने कहा है कि हम लोग हिंदी में सोचते हैं, हिंदी में सपना देखते हैं। तो काम भी हिंदी मे होना चाइए। जब ही देश की तरक्की मुमकिन है।...

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2900 वें जन्मकल्याणक पर विशेष: काशी के नाथ तीर्थंकर पार्श्वनाथ

जैन धर्म के तेईसवें तीर्थंकर पा‌र्श्वनाथ भगवान के 2900वें जन्मकल्याणक पर पढ़िए विशेष आलेख, जिसे लिखा है राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित प्रो. अनेकांत कुमार जैन ने ।...

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तीर्थंकर : चंदाप्रभु और पार्श्वनाथ : समानता और विषमताओं पर एक नजर

तीर्थंकर चंदाप्रभु और पार्श्वनाथ का एक ही तिथि को जन्म और तप कल्याणक, सभी गुण समान पर कद, आयु, रंग और तीर्थकाल में जमीन आसमान का अंतर हैं। दो तीर्थंकरों के...

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